📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Abhishek727
अपराध
इंदौर: 66 करोड़ लोन घोटाले में 21 आरोपियों को विशेष पीएमएलए अदालत ने तलब
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 02 अक्टू. 2026, 12:45 PM
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इंदौर की विशेष पीएमएलए अदालत ने रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े 66 करोड़ रुपये के लोन घोटाले में 21 व्यक्तियों व संस्थाओं को तलब किया है, जिसमें फर्जी बिल और लॉरी रसीदों से बैंक क्रेडिट का दुरुपयोग उजागर हुआ।
इंदौर की विशेष पीएमएलए अदालत ने रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े 66 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले में 21 आरोपियों, जिनमें कंपनी के अधिकारी और सम्बद्ध फर्में शामिल हैं, को तलब किया है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में पता चला कि फर्जी बिल और लॉरी रसीदों के माध्यम से बैंक क्रेडिट सुविधाएँ प्राप्त कर लाखों रुपये का दुरुपयोग किया गया।
अदालत के दस्तावेज़ों के अनुसार, इन नकली दस्तावेज़ों ने कई बैंकों को बिना उचित जांच के फंड जारी करने के लिए प्रेरित किया। ईडी की रिपोर्ट में बताया गया कि झूठे कागजातों ने वैध व्यापार लेन‑देन का दिखावा किया, जिससे आरोपियों को लोन राशि निकालने में मदद मिली।
अदालत का यह आदेश मामले में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दर्शाता है कि जांच से आगे बढ़कर अभियोजन की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। आरोपियों को पैसे की धुलाई, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत पीएमएलए के तहत जवाब देना होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस बैंकिंग क्षेत्र की दस्तावेज़ी धोखाधड़ी के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करता है और बड़े वित्तीय अपराधों से निपटने में विशेष अदालतों की भूमिका को रेखांकित करता है।
जांच जारी है, और आगे की गिरफ्तारी या संपत्ति जब्ती की संभावना है, क्योंकि अभियोजन पक्ष शेष संदिग्धों के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रहा है।
अदालत के दस्तावेज़ों के अनुसार, इन नकली दस्तावेज़ों ने कई बैंकों को बिना उचित जांच के फंड जारी करने के लिए प्रेरित किया। ईडी की रिपोर्ट में बताया गया कि झूठे कागजातों ने वैध व्यापार लेन‑देन का दिखावा किया, जिससे आरोपियों को लोन राशि निकालने में मदद मिली।
अदालत का यह आदेश मामले में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दर्शाता है कि जांच से आगे बढ़कर अभियोजन की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। आरोपियों को पैसे की धुलाई, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत पीएमएलए के तहत जवाब देना होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस बैंकिंग क्षेत्र की दस्तावेज़ी धोखाधड़ी के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करता है और बड़े वित्तीय अपराधों से निपटने में विशेष अदालतों की भूमिका को रेखांकित करता है।
जांच जारी है, और आगे की गिरफ्तारी या संपत्ति जब्ती की संभावना है, क्योंकि अभियोजन पक्ष शेष संदिग्धों के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रहा है।