📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Commerce and Industry (India)
बिज़नेस
भारत का WTO मछलीपालन समझौता पारंपरिक मछुआरों में चिंता पैदा
✍️ BusinessLine
🗓 28 जुल. 2026, 04:37 AM
👁 5
भारत के हालिया WTO मछलीपालन समझौते से पारंपरिक मछुआरों में चिंता उत्पन्न हुई है, जो डरते हैं कि यह समझौता उनके जीवनयापन और प्रथाओं को बदल सकता है।
भारत ने हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के साथ एक मछलीपालन समझौता किया है, जो उसके व्यापारिक दायित्वों में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस समझौते के तहत मछली उत्पादों के व्यापार और नियमों को मानकीकृत करने की उम्मीद है।
परंतु, देश भर के पारंपरिक मछुआरों ने चिंता जताई है कि नई शर्तें उनके स्थानीय मछली पकड़ने के तरीकों, कोटा और जीवनयापन पर असर डाल सकती हैं।
मछुआरों का डर है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सख्त कोटा छोटे स्तर के ऑपरेटरों के लिए उपलब्ध मछली की मात्रा घटा सकते हैं।
स्थानीय संघों ने यह आग्रह किया है कि समझौते के लागू होने से पहले छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और सुरक्षा उपाय तैयार किए जाएँ।
इस समझौते के तहत मछली उत्पादों के व्यापार और नियमों को मानकीकृत करने की उम्मीद है।
परंतु, देश भर के पारंपरिक मछुआरों ने चिंता जताई है कि नई शर्तें उनके स्थानीय मछली पकड़ने के तरीकों, कोटा और जीवनयापन पर असर डाल सकती हैं।
मछुआरों का डर है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सख्त कोटा छोटे स्तर के ऑपरेटरों के लिए उपलब्ध मछली की मात्रा घटा सकते हैं।
स्थानीय संघों ने यह आग्रह किया है कि समझौते के लागू होने से पहले छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और सुरक्षा उपाय तैयार किए जाएँ।