📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jorge Royan
खानपान
भारत के नए खाद्य चेतावनी लेबल पर आलोचना: बहुत कमजोर, बहुत कड़े
✍️ Astro Awani
🗓 18 अक्टू. 2026, 09:03 AM
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भारत में हाल ही में लागू किए गए खाद्य चेतावनी लेबलों को उद्योग और स्वास्थ्य समूहों से विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जो इन्हें बहुत ढीला या अत्यधिक बोझिल मानते हैं।
भारतीय सरकार ने प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर अनिवार्य चेतावनी लेबल लागू किए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक शर्करा, नमक या अस्वस्थ वसा वाले सामान की जानकारी मिलेगी। इन लेबलों को जारी होते ही उद्योग और स्वास्थ्य समूहों से तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा है। खाद्य उद्योग का कहना है कि चेतावनी के मानदंड बहुत कमजोर हैं, जिससे कई उत्पादों को जांच से बाहर रखा जा रहा है, जबकि उपभोक्ता संगठनों का तर्क है कि लेबलिंग की शर्तें बहुत कड़ी हैं और खरीदारों को भ्रमित कर सकती हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अस्पष्ट मानक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा डाल सकते हैं और लागत बढ़ा सकते हैं, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य समर्थक मानते हैं कि स्पष्ट और कड़े नियमों से आहार‑संबंधी रोगों में कमी आएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अंतिम दिशा‑निर्देश जारी करने से पहले वह सभी प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करेगा।
यह विवाद उपभोक्ता सुरक्षा और व्यावहारिक कार्यान्वयन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है, और सरकार पर ऐसा लेबलिंग ढांचा तैयार करने का दबाव है जो स्वास्थ्य लक्ष्यों और उद्योग की व्यवहारिकता दोनों को पूरा करे।
उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अस्पष्ट मानक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा डाल सकते हैं और लागत बढ़ा सकते हैं, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य समर्थक मानते हैं कि स्पष्ट और कड़े नियमों से आहार‑संबंधी रोगों में कमी आएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अंतिम दिशा‑निर्देश जारी करने से पहले वह सभी प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करेगा।
यह विवाद उपभोक्ता सुरक्षा और व्यावहारिक कार्यान्वयन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है, और सरकार पर ऐसा लेबलिंग ढांचा तैयार करने का दबाव है जो स्वास्थ्य लक्ष्यों और उद्योग की व्यवहारिकता दोनों को पूरा करे।