📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Micro,Small & Medium Enterprises, Gove
बिज़नेस
भारत के MSME अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं, पर एआई अपनाने में कमी
✍️ YourStory.com
🗓 22 जुल. 2026, 02:08 PM
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छोटे और मध्यम उद्यम भारत के जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, पर हालिया सर्वेक्षण से पता चलता है कि अधिकांश ने अभी तक एआई को अपनी प्रक्रियाओं में शामिल नहीं किया है।
भारत के माइक्रो, स्मॉल और मिडियम एंटरप्राइजेज (MSME) देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 30% हिस्सा हैं और लगभग 40% कार्यबल को रोजगार देते हैं। ये उद्यम विशेष रूप से विनिर्माण, खुदरा और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
हालिया उद्योग सर्वेक्षण से पता चलता है कि इन फर्मों में से केवल एक छोटा हिस्सा ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों को अपनाया है। कुछ ही एआई का उपयोग इन्वेंटरी प्रबंधन या ग्राहक विश्लेषण के लिए करते हैं, जबकि अधिकांश अभी भी मैनुअल प्रक्रियाओं और पुरानी सॉफ्टवेयर पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य बाधाएँ जागरूकता की कमी, उच्च प्रारंभिक लागत और ऐसे सिस्टम को लागू करने व बनाए रखने के लिए कुशल कर्मियों की कमी हैं। कई MSME के पास एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए पूंजी भी नहीं है।
सरकार ने इस अंतर को पाटने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें एआई प्रशिक्षण के लिए सब्सिडी और औद्योगिक क्लस्टरों में डिजिटल हब का निर्माण शामिल है। चुनौती यह है कि इन नीतियों को व्यापक अभ्यास में बदला जाए ताकि MSME एआई का उपयोग करके उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकें।
हालिया उद्योग सर्वेक्षण से पता चलता है कि इन फर्मों में से केवल एक छोटा हिस्सा ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों को अपनाया है। कुछ ही एआई का उपयोग इन्वेंटरी प्रबंधन या ग्राहक विश्लेषण के लिए करते हैं, जबकि अधिकांश अभी भी मैनुअल प्रक्रियाओं और पुरानी सॉफ्टवेयर पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य बाधाएँ जागरूकता की कमी, उच्च प्रारंभिक लागत और ऐसे सिस्टम को लागू करने व बनाए रखने के लिए कुशल कर्मियों की कमी हैं। कई MSME के पास एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए पूंजी भी नहीं है।
सरकार ने इस अंतर को पाटने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें एआई प्रशिक्षण के लिए सब्सिडी और औद्योगिक क्लस्टरों में डिजिटल हब का निर्माण शामिल है। चुनौती यह है कि इन नीतियों को व्यापक अभ्यास में बदला जाए ताकि MSME एआई का उपयोग करके उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकें।