📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Our World in Data
बिज़नेस
विश्व युद्ध और कम मानसून के बीच भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी
✍️ NDTV
🗓 01 सित. 2026, 04:40 PM
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जारी संघर्ष और कम मानसून के बावजूद भारत की जीडीपी 7.8% बढ़ी, एनडीटीवी ने बताया।
भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ने वर्ष‑दर‑वर्ष 7.8% की तेज़ी से वृद्धि दर्ज की, जो कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आगे है। यह वृद्धि विश्व में यूक्रेन युद्ध से उत्पन्न भू‑राजनीतिक तनाव और कम मानसून के कारण कृषि क्षेत्र में संभावित गिरावट के बीच हासिल हुई।
आर्थिक विश्लेषकों ने इस उच्च अंक को घरेलू उपभोग की मजबूती और सेवा क्षेत्र की तेज़ी से बढ़ती मांग को मुख्य कारण बताया। सरकार द्वारा लागू किए गए प्रोत्साहन उपाय और निरंतर विदेशी निवेश ने भी कम बारिश के प्रभाव को कम करने में मदद की।
एनडीटीवी द्वारा उजागर किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि बाहरी झटकों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था गति बनाए रख रही है। नीति निर्माताओं को महंगाई के दबावों पर नज़र रखनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि यह वृद्धि विशेष रूप से कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में समावेशी बनी रहे।
हालांकि कम मानसून ने फसल उत्पादन को लेकर चिंताएँ बढ़ा दीं, समग्र मैक्रो‑इकोनॉमिक माहौल सहायक रहा, जिसमें क्रेडिट वृद्धि और बुनियादी ढांचा खर्च योजना के अनुसार चल रहा है। सरकार ने किसानों को अतिरिक्त राहत प्रदान करने का वादा किया है ताकि कमजोर बारिश के असर को कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्च वृद्धि को बनाए रखने के लिए वित्तीय सतर्कता और लक्षित सुधारों के बीच संतुलन आवश्यक होगा, खासकर जब वैश्विक अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं।
आर्थिक विश्लेषकों ने इस उच्च अंक को घरेलू उपभोग की मजबूती और सेवा क्षेत्र की तेज़ी से बढ़ती मांग को मुख्य कारण बताया। सरकार द्वारा लागू किए गए प्रोत्साहन उपाय और निरंतर विदेशी निवेश ने भी कम बारिश के प्रभाव को कम करने में मदद की।
एनडीटीवी द्वारा उजागर किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि बाहरी झटकों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था गति बनाए रख रही है। नीति निर्माताओं को महंगाई के दबावों पर नज़र रखनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि यह वृद्धि विशेष रूप से कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में समावेशी बनी रहे।
हालांकि कम मानसून ने फसल उत्पादन को लेकर चिंताएँ बढ़ा दीं, समग्र मैक्रो‑इकोनॉमिक माहौल सहायक रहा, जिसमें क्रेडिट वृद्धि और बुनियादी ढांचा खर्च योजना के अनुसार चल रहा है। सरकार ने किसानों को अतिरिक्त राहत प्रदान करने का वादा किया है ताकि कमजोर बारिश के असर को कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्च वृद्धि को बनाए रखने के लिए वित्तीय सतर्कता और लक्षित सुधारों के बीच संतुलन आवश्यक होगा, खासकर जब वैश्विक अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं।