📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
विदेश
नई दिल्ली में भारत ने आयोजित किया पहला एससीओ सिविलाइज़ेशन डायलॉग फोरम
✍️ Asianet Newsable
🗓 30 सित. 2026, 11:16 PM
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नई दिल्ली में पहला एससीओ सिविलाइज़ेशन डायलॉग फोरम आयोजित होगा, जो सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक आदान‑प्रदान का नया मंच बनेगा।
नई दिल्ली में पहला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सिविलाइज़ेशन डायलॉग फोरम आयोजित किया जाएगा, जो इस क्षेत्रीय गठबंधन के इतिहास में पहली बार है। इस कार्यक्रम को इस वर्ष के बाद के समय में आयोजित करने की योजना है और इसे भारतीय सरकार ने एससीओ के साथ मिलकर तैयार किया है।
फोरम का उद्देश्य आठ सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक समझ और सभ्यताओं के बीच संबंधों को गहरा करना है, जिससे विद्वानों, कलाकारों और नीति निर्माताओं को साझा विरासत और समकालीन चुनौतियों पर चर्चा करने का मंच मिल सके।
एससीओ के सभी सदस्य देशों—चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान—के प्रतिनिधियों की उपस्थिति की उम्मीद है, साथ ही कुछ सहयोगी संगठनों के पर्यवेक्षक भी भाग लेंगे। यह भागीदारी सुरक्षा‑केन्द्रित गठबंधन में सॉफ्ट‑पावर सहयोग के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।
भारतीय अधिकारियों ने इस फोरम को देश की विविध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने और एससीओ के भीतर कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करने के अवसर के रूप में बताया है। कार्यक्रम में पैनल चर्चाएँ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और विभिन्न देशों की परम्पराओं को दर्शाने वाली प्रदर्शनी शामिल होंगी।
सिविलाइज़ेशन डायलॉग फोरम की शुरुआत एससीओ के एजेंडे में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर सांस्कृतिक कूटनीति को शामिल करने का एक रणनीतिक कदम है, जो भविष्य में क्षेत्रीय बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
फोरम का उद्देश्य आठ सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक समझ और सभ्यताओं के बीच संबंधों को गहरा करना है, जिससे विद्वानों, कलाकारों और नीति निर्माताओं को साझा विरासत और समकालीन चुनौतियों पर चर्चा करने का मंच मिल सके।
एससीओ के सभी सदस्य देशों—चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान—के प्रतिनिधियों की उपस्थिति की उम्मीद है, साथ ही कुछ सहयोगी संगठनों के पर्यवेक्षक भी भाग लेंगे। यह भागीदारी सुरक्षा‑केन्द्रित गठबंधन में सॉफ्ट‑पावर सहयोग के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।
भारतीय अधिकारियों ने इस फोरम को देश की विविध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने और एससीओ के भीतर कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करने के अवसर के रूप में बताया है। कार्यक्रम में पैनल चर्चाएँ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और विभिन्न देशों की परम्पराओं को दर्शाने वाली प्रदर्शनी शामिल होंगी।
सिविलाइज़ेशन डायलॉग फोरम की शुरुआत एससीओ के एजेंडे में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर सांस्कृतिक कूटनीति को शामिल करने का एक रणनीतिक कदम है, जो भविष्य में क्षेत्रीय बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा दे सकता है।