📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Deepak Gupta
विदेश
UN मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन की त्रुटियों पर भारत ने जताई आपत्ति
✍️ NDTV
🗓 09 सित. 2026, 11:38 AM
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भारत ने 1 जुलाई जारी UN मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश को स्वतंत्र राज्य और अक्साई चिन की सीमा में त्रुटियों को उजागर किया है।
नई दिल्ली ने बुधवार को एक राजनयिक प्रोटेस्ट दर्ज किया, जब संयुक्त राष्ट्र ने 1 जुलाई को एक राजनीतिक मानचित्र प्रकाशित किया, जिसमें भारतीय अधिकारियों के अनुसार कई सीमा‑संबंधी त्रुटियाँ थीं। यह मानचित्र दक्षिण एशिया से संबंधित एक यूएन जनरल असेंबली प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान व्यापक रूप से इस्तेमाल हुआ।
भारत की आपत्ति दो मुख्य अनियमितताओं पर आधारित है। पहला, मानचित्र अरुणाचल प्रदेश को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में दिखाता है, जो असम और चीन की सीमा से सटा हुआ है, जबकि भारत इस क्षेत्र को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। दूसरा, अक्साई चिन का चित्रण—जिसे भारत चीन के प्रशासन में मानता है—देश की आधिकारिक रेखा‑ऑफ़‑एक्चुअल‑कंट्रोल (एलएसी) के अनुरूप नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र को एक औपचारिक नोट भेजकर इन त्रुटियों को सुधारने और भविष्य के मानचित्रों में अंतरराष्ट्रीय मान्य सीमाओं को प्रतिबिंबित करने का आग्रह किया। इस नोट में कहा गया कि ऐसी किसी भी प्रस्तुति से देश की क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुँच सकता है।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह घटना दक्षिण एशिया में सीमा‑विवादों से जुड़ी कई हालिया मानचित्र‑विवादों में एक नया उदाहरण है। विशेषज्ञों का मानना है कि विवादित क्षेत्रों में मानचित्र बनाते समय राजनयिक समन्वय की अत्यधिक आवश्यकता होती है।
भारत की आपत्ति दो मुख्य अनियमितताओं पर आधारित है। पहला, मानचित्र अरुणाचल प्रदेश को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में दिखाता है, जो असम और चीन की सीमा से सटा हुआ है, जबकि भारत इस क्षेत्र को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। दूसरा, अक्साई चिन का चित्रण—जिसे भारत चीन के प्रशासन में मानता है—देश की आधिकारिक रेखा‑ऑफ़‑एक्चुअल‑कंट्रोल (एलएसी) के अनुरूप नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र को एक औपचारिक नोट भेजकर इन त्रुटियों को सुधारने और भविष्य के मानचित्रों में अंतरराष्ट्रीय मान्य सीमाओं को प्रतिबिंबित करने का आग्रह किया। इस नोट में कहा गया कि ऐसी किसी भी प्रस्तुति से देश की क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुँच सकता है।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह घटना दक्षिण एशिया में सीमा‑विवादों से जुड़ी कई हालिया मानचित्र‑विवादों में एक नया उदाहरण है। विशेषज्ञों का मानना है कि विवादित क्षेत्रों में मानचित्र बनाते समय राजनयिक समन्वय की अत्यधिक आवश्यकता होती है।