📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mouse is back
बिज़नेस
भारत-कनाडा CEPA वार्ता में नई दिल्ली का बाजार पहुंच, ओटावा का निवेश सुरक्षा की मांग
✍️ Livemint
🗓 17 अक्टू. 2026, 04:01 AM
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भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की वार्ता तेज़ी से चल रही है, जहाँ नई दिल्ली बाजार पहुंच को बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है और ओटावा निवेश सुरक्षा पर ध्यान दे रहा है।
नई दिल्ली ने CEPA वार्ता में अपना मुख्य लक्ष्य भारतीय वस्तुओं व सेवाओं के लिए कनाडा बाजार में व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना बताया है, जिसमें मौजूदा टैरिफ़ बाधाओं को हटाना और पेशेवर योग्यता की पारस्परिक मान्यता शामिल है। वहीं ओटावा ने निवेशकों की सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत उपायों की मांग की है। दोनों पक्ष उच्च‑स्तरीय वार्ताओं को अगले हफ्तों में जारी रखने और अंतिम समझौते के मसौदे से पहले बचे मुद्दों को सुलझाने का लक्ष्य रख रहे हैं। यह चर्चा दोनों देशों की आर्थिक संबंधों को गहरा करने की रणनीतिक इच्छा को दर्शाती है, विशेषकर वैश्विक व्यापार के बदलते परिदृश्य में।
भारतीय व्यापार मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को कनाडा में विस्तारित प्रवेश के प्राथमिक क्षेत्र के रूप में उजागर किया है। इसके विपरीत, कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट विवाद‑निवारण तंत्र और गैर‑बाजार‑विकृतियों से बचाव के उपायों पर ज़ोर दिया है। CEPA वार्ता के तेज़ी से आगे बढ़ने के साथ दोनों देशों के व्यापार समुदाय संभावित द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि की आशा कर रहे हैं।
यदि समझौता सफल होता है, तो इससे निवेश प्रवाह, रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में वृद्धि की संभावना है, जो दोनों लोकतंत्रों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को और सुदृढ़ करेगा।
भारतीय व्यापार मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को कनाडा में विस्तारित प्रवेश के प्राथमिक क्षेत्र के रूप में उजागर किया है। इसके विपरीत, कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट विवाद‑निवारण तंत्र और गैर‑बाजार‑विकृतियों से बचाव के उपायों पर ज़ोर दिया है। CEPA वार्ता के तेज़ी से आगे बढ़ने के साथ दोनों देशों के व्यापार समुदाय संभावित द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि की आशा कर रहे हैं।
यदि समझौता सफल होता है, तो इससे निवेश प्रवाह, रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में वृद्धि की संभावना है, जो दोनों लोकतंत्रों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को और सुदृढ़ करेगा।