📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Kavali Chandrakanth KCK
टेक्नोलॉजी
IIIT-हैदराबाद प्रयोगशाला ने सस्ते समाधान से जंगली सड़कों को नियंत्रित करने का प्रस्ताव रखा
✍️ Deccan Chronicle
🗓 22 जुल. 2026, 03:18 AM
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IIIT-हैदराबाद की प्रयोगशाला ने एक सस्ता तकनीकी समाधान पेश किया है जो भारत की सड़कों पर जंगली ट्रैफ़िक को नियंत्रित करने में मदद करेगा। यह समाधान बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव के बिना ट्रैफ़िक प्रवाह और सुरक्षा को बेहतर बनाने का वादा करता है।
हैदराबाद सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT‑H) ने एक नया सस्ता तकनीकी समाधान पेश किया है जो भारत की कई शहरों में पाई जाने वाली जंगली सड़क स्थितियों को दूर करने के लिए बनाया गया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह समाधान मौजूदा ट्रैफ़िक प्रबंधन प्रणालियों की तुलना में कम लागत में जल्दी लागू किया जा सकता है।
विस्तृत विनिर्देश अभी जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन यह तकनीक मौजूदा सड़क अवसंरचना के साथ एकीकृत होकर वास्तविक‑समय डेटा का उपयोग करके ट्रैफ़िक सिग्नल और लेन उपयोग को अनुकूलित करने का दावा करती है। प्रारंभिक परीक्षणों से ट्रैफ़िक जाम में स्पष्ट कमी और सुरक्षा मापदंडों में सुधार दिखा है।
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह प्रणाली प्रभावी साबित होती है, तो इसे देश भर के नगरपालिका निकायों द्वारा अपनाया जा सकता है, जिससे महंगे सड़क पुनर्निर्माण परियोजनाओं का एक स्केलेबल विकल्प उपलब्ध होगा। IIIT‑H टीम आने वाले महीनों में पायलट परियोजनाओं के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है।
यह घोषणा विश्वविद्यालय के परिसर में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान की गई, जहाँ अधिकारियों ने शहरी और ग्रामीण दोनों ट्रैफ़िक नेटवर्क के लिए इस तकनीक के संभावित लाभों पर प्रकाश डाला।
विस्तृत विनिर्देश अभी जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन यह तकनीक मौजूदा सड़क अवसंरचना के साथ एकीकृत होकर वास्तविक‑समय डेटा का उपयोग करके ट्रैफ़िक सिग्नल और लेन उपयोग को अनुकूलित करने का दावा करती है। प्रारंभिक परीक्षणों से ट्रैफ़िक जाम में स्पष्ट कमी और सुरक्षा मापदंडों में सुधार दिखा है।
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह प्रणाली प्रभावी साबित होती है, तो इसे देश भर के नगरपालिका निकायों द्वारा अपनाया जा सकता है, जिससे महंगे सड़क पुनर्निर्माण परियोजनाओं का एक स्केलेबल विकल्प उपलब्ध होगा। IIIT‑H टीम आने वाले महीनों में पायलट परियोजनाओं के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है।
यह घोषणा विश्वविद्यालय के परिसर में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान की गई, जहाँ अधिकारियों ने शहरी और ग्रामीण दोनों ट्रैफ़िक नेटवर्क के लिए इस तकनीक के संभावित लाभों पर प्रकाश डाला।