📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
राजनीति
हिमाचल प्रदेश ने केंद्र से चार लेन वाली सड़कों के भूमि अधिग्रहण खर्च की समीक्षा की माँग की
✍️ ET Government
🗓 29 अग. 2026, 02:36 AM
👁 23
हिमाचल प्रदेश सरकार केंद्र सरकार से चार लेन वाली हाईवे परियोजनाओं के भूमि अधिग्रहण खर्च की पुनर्समीक्षा करने का आग्रह करेगी।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के राजमार्ग मंत्रालय को एक औपचारिक याचिका प्रस्तुत करने का इरादा जताया है। इस याचिका में चार लेन वाली हाईवे निर्माण के लिए वर्तमान भूमि अधिग्रहण लागत संरचना की पुनर्समीक्षा की मांग की गई है, क्योंकि राज्य को इसका अत्यधिक वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास में देरी हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य आगामी परियोजनाओं के अनुमानित खर्च और मौजूदा अधिग्रहण मानदंडों के वित्तीय प्रभाव को दर्शाते हुए एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा। इस प्रस्ताव में उन विशेष मार्गों को उजागर किया जाएगा जहाँ भूमि प्राप्ति में अड़चनें आ रही हैं, और केंद्र से अधिक संतुलित लागत‑साझाकरण तंत्र की अपेक्षा की जाएगी।
यह कदम हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य के तहत आया है। राज्य के नेताओं का मानना है कि भूमि अधिग्रहण के बोझ को कम करने से परियोजनाओं की समयसीमा तेज होगी और राज्य कोष पर कुल खर्च घटेगा।
केंद्र सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि आने वाले हफ़्तों में चर्चा शुरू होगी और दोनों पक्षों के लिए अनुकूल समाधान निकाला जा सकेगा, जिससे राज्य की बुनियादी ढांचा योजनाएँ आगे बढ़ेंगी।
सूत्रों के अनुसार, राज्य आगामी परियोजनाओं के अनुमानित खर्च और मौजूदा अधिग्रहण मानदंडों के वित्तीय प्रभाव को दर्शाते हुए एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा। इस प्रस्ताव में उन विशेष मार्गों को उजागर किया जाएगा जहाँ भूमि प्राप्ति में अड़चनें आ रही हैं, और केंद्र से अधिक संतुलित लागत‑साझाकरण तंत्र की अपेक्षा की जाएगी।
यह कदम हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य के तहत आया है। राज्य के नेताओं का मानना है कि भूमि अधिग्रहण के बोझ को कम करने से परियोजनाओं की समयसीमा तेज होगी और राज्य कोष पर कुल खर्च घटेगा।
केंद्र सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि आने वाले हफ़्तों में चर्चा शुरू होगी और दोनों पक्षों के लिए अनुकूल समाधान निकाला जा सकेगा, जिससे राज्य की बुनियादी ढांचा योजनाएँ आगे बढ़ेंगी।