📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
देश
हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए 'एंटी-चित्ता' टेस्ट अनिवार्य
✍️ Hindustan Times
🗓 27 जून 2026, 01:02 AM
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी भर्तियों के लिए 'एंटी-चित्ता' (नशीली दवाओं के सेवन की जांच) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य राज्य के सरकारी कर्मचारियों के बीच नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकना है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की घोषणा की है, जिसके तहत राज्य में सरकारी रोजगार चाहने वाले सभी व्यक्तियों के लिए नशीली दवाओं के सेवन की जांच, जिसे 'एंटी-चित्ता' टेस्ट कहा जाता है, को अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय राज्य के सरकारी क्षेत्र में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या से निपटने के प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह नया नियम राज्य सरकार के अधीन सभी विभागों और एजेंसियों में लागू किया जाएगा। सरकारी पद के लिए विचार किए जाने से पहले संभावित उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के हिस्से के रूप में इस विशिष्ट जांच को पास करना होगा। परीक्षण की सटीक प्रक्रिया और तौर-तरीकों को लेकर अधिकारियों द्वारा आगे विस्तृत जानकारी दिए जाने की उम्मीद है।
इस पहल को हिमाचल प्रदेश प्रशासन द्वारा एक नशा-मुक्त कार्यबल सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सेवा भूमिकाओं में नशीली दवाओं के सेवन करने वालों के प्रवेश को रोकने के लिए एक सक्रिय उपाय के रूप में देखा जा रहा है। 'चित्ता' शब्द का प्रयोग आमतौर पर इस क्षेत्र में हेरोइन या मेथामफेटामाइन जैसी सिंथेटिक दवाओं के लिए किया जाता है।
यह नया नियम राज्य सरकार के अधीन सभी विभागों और एजेंसियों में लागू किया जाएगा। सरकारी पद के लिए विचार किए जाने से पहले संभावित उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के हिस्से के रूप में इस विशिष्ट जांच को पास करना होगा। परीक्षण की सटीक प्रक्रिया और तौर-तरीकों को लेकर अधिकारियों द्वारा आगे विस्तृत जानकारी दिए जाने की उम्मीद है।
इस पहल को हिमाचल प्रदेश प्रशासन द्वारा एक नशा-मुक्त कार्यबल सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सेवा भूमिकाओं में नशीली दवाओं के सेवन करने वालों के प्रवेश को रोकने के लिए एक सक्रिय उपाय के रूप में देखा जा रहा है। 'चित्ता' शब्द का प्रयोग आमतौर पर इस क्षेत्र में हेरोइन या मेथामफेटामाइन जैसी सिंथेटिक दवाओं के लिए किया जाता है।