📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Satdeep Gill
देश
हाई कोर्ट ने कहा सीनियर सिटिजन्स एक्ट से बहुता के बहु को निकाला नहीं जा सकता
✍️ livelaw.in
🗓 09 सित. 2026, 11:35 AM
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटिजन्स एक्ट का प्रयोग बहुता के बहु को घर से निकालने के लिए नहीं किया जा सकता।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सीनियर सिटिजन्स (मेंटेनेंस एंड वेलफेयर) एक्ट का उपयोग किसी बहुता की बहु को घर से बाहर निकालने के लिए नहीं किया जा सकता। बहुता के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा बहु को निकालने के लिए दायर याचिका पर न्यायालय ने यह निर्णय सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि यह अधिनियम वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और रखरखाव के लिए बनाया गया है, न कि पारिवारिक संपत्ति विवाद या निकासी के मामलों को सुलझाने के लिए। निकासी के मामलों को उचित संपत्ति या किरायेदारी कानूनों के तहत ही निपटाया जाना चाहिए, और सीनियर सिटिजन्स एक्ट में सह-रहने वालों को बेदखल करने का अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों को सलाह दी गई कि यदि वे अकेले रहने का अधिकार चाहते हैं तो भारतीय अनुबंध अधिनियम और संबंधित संपत्ति विधियों के तहत उपाय तलाशें। यह निर्णय सीनियर‑सिटिजन्स कानून की सीमित सीमा को रेखांकित करता है और पारिवारिक विवादों में इसके दुरुपयोग को रोकता है।
कोर्ट ने कहा कि यह अधिनियम वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और रखरखाव के लिए बनाया गया है, न कि पारिवारिक संपत्ति विवाद या निकासी के मामलों को सुलझाने के लिए। निकासी के मामलों को उचित संपत्ति या किरायेदारी कानूनों के तहत ही निपटाया जाना चाहिए, और सीनियर सिटिजन्स एक्ट में सह-रहने वालों को बेदखल करने का अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों को सलाह दी गई कि यदि वे अकेले रहने का अधिकार चाहते हैं तो भारतीय अनुबंध अधिनियम और संबंधित संपत्ति विधियों के तहत उपाय तलाशें। यह निर्णय सीनियर‑सिटिजन्स कानून की सीमित सीमा को रेखांकित करता है और पारिवारिक विवादों में इसके दुरुपयोग को रोकता है।