📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim/ Augustus Binu
अपराध
हाईकोर्ट ने पति की तलाक मांग ठुकराई, रोजमर्रा के झगड़े मानसिक क्रूरता नहीं
✍️ Amar Ujala
🗓 20 अग. 2026, 05:43 PM
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हाईकोर्ट ने पति की तलाक मांग को ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि रोजमर्रा के झगड़े मानसिक क्रूरता नहीं होते। इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ कि तलाक के लिए क्या मापदंड हैं।
हाईकोर्ट ने पति की तलाक मांग को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि रोजमर्रा के झगड़े मानसिक क्रूरता के रूप में नहीं गिने जाते। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि मानसिक दुर्व्यवहार के आधार पर तलाक के लिए गंभीर और लगातार आचरण आवश्यक है, न कि सामान्य झगड़े। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि अदालतें तलाक के आधारों की सख्ती से जाँच करती हैं, ताकि हल्के विवादों के कारण जोड़ों को अलग न किया जाए। यह मामला, जिसने सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया था, अब समान दावों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन गया है।