धर्म
हिंदौन सिटी के पाली सिंघान जट्ट में रामकथा समापन पर विशाल भंडारा
हिंदौन उपखंड के पाली सिंघान जट्ट में आयोजित रामकथा समापन समारोह में सैकड़ों लोगों ने पंगत प्रसादी ग्रहण की, जहाँ दिव्यांग आयोजक घनश्याम प्रजापत को सम्मानित किया गया।
हिंदौन उपखंड के पाली सिंघान जट्ट में मंगलवार को आयोजित रामकथा के समापन समारोह में घनश्याम प्रजापत एवं साध्वी जयप्रिया बरसाना के मुखारविंद से एक सप्ताह तक चल रही कथा का समापन किया गया। समापन के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोग पंगत प्रसादी ग्रहण करने आए।
भंडारे में दिव्यांग आयोजक घनश्याम प्रजापत को दुपट्टा व साफा पहनाकर सम्मानित किया गया। वह व्हीलचेयर पर रहते हुए भी अपनी भक्ति भावना से लोगों के दिलों में स्थान बना चुके थे, और उपस्थित जनसमुदाय ने उनके उत्साह की सराहना की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामेश्वर ठेकेदार, संरक्षक दक्ष प्रजापति विकास संस्थान, करौली ने कहा कि धार्मिक आयोजनों से मोक्ष की प्राप्ति और भाईचारे का विकास होता है। उन्होंने उच्च शिक्षा व बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया और जनप्रतिनिधि बनने के लिए राजनैतिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया।
समारोह में गंगाराम प्रजापत (सचिव), श्री लाल पटवारी, केदार लाल, हेतराम प्रजापत, दिनेश प्रजापत, सोहन लाल प्रजापति (सेवानिवृत्त प्राध्यापक), रत्तीराम, जगदीश प्रजापत, लखन प्रजापत (ठेकेदार), पिंटू प्रजापत, जगदीश प्रजापत ढंड, चरण प्रजापत, विष्णु प्रजापति, केदार लाल प्रजापति, सुखराम प्रजापत, हेतराम प्रजापत, पप्पू प्रजापत, सत्यभान प्रजापत सहित कई स्थानीय व्यक्तियों ने भाग लिया।
भंडारे में दिव्यांग आयोजक घनश्याम प्रजापत को दुपट्टा व साफा पहनाकर सम्मानित किया गया। वह व्हीलचेयर पर रहते हुए भी अपनी भक्ति भावना से लोगों के दिलों में स्थान बना चुके थे, और उपस्थित जनसमुदाय ने उनके उत्साह की सराहना की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामेश्वर ठेकेदार, संरक्षक दक्ष प्रजापति विकास संस्थान, करौली ने कहा कि धार्मिक आयोजनों से मोक्ष की प्राप्ति और भाईचारे का विकास होता है। उन्होंने उच्च शिक्षा व बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया और जनप्रतिनिधि बनने के लिए राजनैतिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया।
समारोह में गंगाराम प्रजापत (सचिव), श्री लाल पटवारी, केदार लाल, हेतराम प्रजापत, दिनेश प्रजापत, सोहन लाल प्रजापति (सेवानिवृत्त प्राध्यापक), रत्तीराम, जगदीश प्रजापत, लखन प्रजापत (ठेकेदार), पिंटू प्रजापत, जगदीश प्रजापत ढंड, चरण प्रजापत, विष्णु प्रजापति, केदार लाल प्रजापति, सुखराम प्रजापत, हेतराम प्रजापत, पप्पू प्रजापत, सत्यभान प्रजापत सहित कई स्थानीय व्यक्तियों ने भाग लिया।