📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
राजनीति
हरभजन सिंह ने शेर-ए-पंजाब लीग को सियासत का अखाड़ा कहा, सरकार पर श्रेय का आरोप
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 10 सित. 2026, 10:17 AM
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पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने शेर‑ए‑पंजाब क्रिकेट लीग पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इसे सियासत के मंच के रूप में इस्तेमाल कर रही है और अनावश्यक श्रेय ले रही है।
शेर‑ए‑पंजाब क्रिकेट लीग, जो इस साल की शुरुआत में प्रदेश में युवा क्रिकेट प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, अब पंजाब में सियासी विवाद का केंद्र बन गई है। जबकि इस टूर्नामेंट को खेल मंच के रूप में पेश किया गया था, कई राजनेताओं ने इसे सरकार की विकास कार्यवाही का प्रमाण मानते हुए समर्थन दिखाया है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह, जिन्होंने जालंधर में लीग के एक मैच में भाग लिया, ने इस आयोजन के पीछे के इरादों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लीग "सियासत का अखाड़ा" बन रही है और सरकार पर अनावश्यक श्रेय लेने का आरोप लगाया, जबकि खिलाड़ियों और आयोजकों के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
राज्य के अधिकारियों ने टिप्पणी के अनुरोध पर कहा कि लीग का उद्देश्य खेल बुनियादी ढाँचा और युवा भागीदारी को बढ़ावा देना है, न कि चुनावी लाभ उठाना। उन्होंने किसी भी सियासी उपयोग को नकारा और कहा कि सरकार का समर्थन केवल खेल संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए है।
हरभजन सिंह के बयान ने सोशल मीडिया पर चर्चा को भड़का दिया है; कुछ लोग उनके विचारों से सहमत हैं, जबकि अन्य लीग को पंजाब के क्रिकेट पर सकारात्मक प्रभाव मानते हैं। अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, परन्तु यह मुद्दा राज्य की आगामी सियासी बहस में उठने की संभावना है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह, जिन्होंने जालंधर में लीग के एक मैच में भाग लिया, ने इस आयोजन के पीछे के इरादों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लीग "सियासत का अखाड़ा" बन रही है और सरकार पर अनावश्यक श्रेय लेने का आरोप लगाया, जबकि खिलाड़ियों और आयोजकों के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
राज्य के अधिकारियों ने टिप्पणी के अनुरोध पर कहा कि लीग का उद्देश्य खेल बुनियादी ढाँचा और युवा भागीदारी को बढ़ावा देना है, न कि चुनावी लाभ उठाना। उन्होंने किसी भी सियासी उपयोग को नकारा और कहा कि सरकार का समर्थन केवल खेल संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए है।
हरभजन सिंह के बयान ने सोशल मीडिया पर चर्चा को भड़का दिया है; कुछ लोग उनके विचारों से सहमत हैं, जबकि अन्य लीग को पंजाब के क्रिकेट पर सकारात्मक प्रभाव मानते हैं। अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, परन्तु यह मुद्दा राज्य की आगामी सियासी बहस में उठने की संभावना है।