📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pankaj Vashisht
मनोरंजन
‘हनुमान अंश’ संगीत ने कमाए ₹200 करोड़, गायकों ने बताया घर पर रिकॉर्डिंग, कोई शुल्क नहीं
✍️ The Indian Express
🗓 11 सित. 2026, 07:40 PM
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धार्मिक एल्बम ‘हनुमान अंश’ ने लगभग ₹200 करोड़ की कमाई की है, जबकि गायक बताते हैं कि गाने घर से रिकॉर्ड किए गए और उन्हें कोई शुल्क नहीं मिला।
‘हनुमान अंश’ नामक धार्मिक संगीत संग्रह ने 200 करोड़ रुपये से अधिक की आय दर्ज कर ली है, जिससे यह हाल के वर्षों के सबसे अधिक कमाई करने वाले आध्यात्मिक एल्बमों में से एक बन गया है। यह आंकड़ा बिक्री, स्ट्रीमिंग रॉयल्टी और विभिन्न डिजिटल‑भौतिक प्लेटफ़ॉर्म पर लाइसेंसिंग समझौतों को मिलाकर तैयार किया गया है।
प्रोजेक्ट में शामिल गायक मीडिया से बात करते हुए बता रहे हैं कि सभी गाने व्यक्तिगत घर के स्टूडियो में रिकॉर्ड किए गए थे, पेशेवर रिकॉर्डिंग हॉल का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस काम के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया; उनका मुख्य प्रेरणा स्रोत हनुमान भक्ति और आध्यात्मिक भावना थी।
एल्बम की सफलता को व्यापक डिजिटल प्रचार, हनुमान पूजा के मौसमी उत्सवों के दौरान बढ़ती लोकप्रियता और प्रमुख स्ट्रीमिंग सेवाओं पर रणनीतिक प्लेसमेंट को श्रेय दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि गायक‑को‑शून्य‑शुल्क मॉडल भविष्य में धार्मिक संगीत परियोजनाओं में भुगतान प्रथा को बदल सकता है।
भले ही गायक सीधे भुगतान नहीं पा रहे हों, निर्माताओं ने आय का एक हिस्सा हनुमान मंदिरों और सामुदायिक कल्याण कार्यक्रमों को दान करने का वादा किया है।
यह घटना भारत के मनोरंजन बाजार में धार्मिक संगीत की बढ़ती व्यावसायिक क्षमता को उजागर करती है, जहाँ आध्यात्मिक सामग्री अब मुख्यधारा के पॉप संगीत के बराबर राजस्व उत्पन्न कर रही है।
प्रोजेक्ट में शामिल गायक मीडिया से बात करते हुए बता रहे हैं कि सभी गाने व्यक्तिगत घर के स्टूडियो में रिकॉर्ड किए गए थे, पेशेवर रिकॉर्डिंग हॉल का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस काम के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया; उनका मुख्य प्रेरणा स्रोत हनुमान भक्ति और आध्यात्मिक भावना थी।
एल्बम की सफलता को व्यापक डिजिटल प्रचार, हनुमान पूजा के मौसमी उत्सवों के दौरान बढ़ती लोकप्रियता और प्रमुख स्ट्रीमिंग सेवाओं पर रणनीतिक प्लेसमेंट को श्रेय दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि गायक‑को‑शून्य‑शुल्क मॉडल भविष्य में धार्मिक संगीत परियोजनाओं में भुगतान प्रथा को बदल सकता है।
भले ही गायक सीधे भुगतान नहीं पा रहे हों, निर्माताओं ने आय का एक हिस्सा हनुमान मंदिरों और सामुदायिक कल्याण कार्यक्रमों को दान करने का वादा किया है।
यह घटना भारत के मनोरंजन बाजार में धार्मिक संगीत की बढ़ती व्यावसायिक क्षमता को उजागर करती है, जहाँ आध्यात्मिक सामग्री अब मुख्यधारा के पॉप संगीत के बराबर राजस्व उत्पन्न कर रही है।