📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sujan Bandyopadhyay
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गुजरात के अभयारण्य में 144 वर्ष बाद फिर लौटे शेर: 17 एशियाई शेरों की नई आबादी
✍️ NDTV
🗓 12 अक्टू. 2026, 04:37 PM
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गुजरात के एक वन्यजीव अभयारण्य ने 144 वर्ष पहले शेरों को खो दिया था, अब यहाँ 17 एशियाई शेरों की आबादी है, जो संरक्षण के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
गुजरात के एक वन्यजीव अभयारण्य में 144 वर्ष के अंतराल के बाद एशियाई शेरों की उल्लेखनीय वापसी हुई है। 17 शेरों की आबादी अब इस संरक्षित क्षेत्र में पाई गई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
मध्य‑19वीं सदी में शिकार और आवास के नुकसान के कारण इस क्षेत्र से शेरों का गायब होना दर्ज किया गया था। दशकों से सरकार ने आवास पुनर्स्थापन, एंटी‑पोचिंग गश्त और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से शेरों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है।
वर्तमान आबादी में निवासी और स्थानांतरित दोनों शेर शामिल हैं, और स्वास्थ्य, आनुवंशिक विविधता तथा जनसंख्या गतिशीलता का आकलन करने के लिए नियमित निगरानी की जा रही है। इस अभयारण्य की सफलता को भारत के अन्य वन्यजीव पुनर्स्थापन परियोजनाओं के लिए एक मॉडल के रूप में सराहा जा रहा है।
राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के निरंतर समर्थन तथा जनता की भागीदारी को शेरों की संख्या को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
मध्य‑19वीं सदी में शिकार और आवास के नुकसान के कारण इस क्षेत्र से शेरों का गायब होना दर्ज किया गया था। दशकों से सरकार ने आवास पुनर्स्थापन, एंटी‑पोचिंग गश्त और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से शेरों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है।
वर्तमान आबादी में निवासी और स्थानांतरित दोनों शेर शामिल हैं, और स्वास्थ्य, आनुवंशिक विविधता तथा जनसंख्या गतिशीलता का आकलन करने के लिए नियमित निगरानी की जा रही है। इस अभयारण्य की सफलता को भारत के अन्य वन्यजीव पुनर्स्थापन परियोजनाओं के लिए एक मॉडल के रूप में सराहा जा रहा है।
राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के निरंतर समर्थन तथा जनता की भागीदारी को शेरों की संख्या को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।