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21 सित. 2026
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जनरेशन Z की दबदगी शेयर बाजार में: गुजरात के छोटे शहरों के युवा बाइसिकल से लेकर फॉर्च्यूनर तक
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann (talk)
बिज़नेस

जनरेशन Z की दबदगी शेयर बाजार में: गुजरात के छोटे शहरों के युवा बाइसिकल से लेकर फॉर्च्यूनर तक

✍️ bhaskarenglish.in 🗓 21 सित. 2026, 12:37 AM 👁 15
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भारत के शेयर बाजार में अब आधे से अधिक निवेशक जनरेशन Z के हैं, और गुजरात के छोटे शहरों के युवा डेढ़ वर्ष में ही बाइसिकल से फॉर्च्यूनर तक का सफर तय कर रहे हैं।

भारत के इक्विटी बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ अब सक्रिय शेयर निवेशकों के आधे से अधिक जनरेशन Z से ताल्लुक रखते हैं। यह रुझान दर्शाता है कि कैसे युवा भारतीय, जिनमें से कई अपनी शुरुआती बीसवीं साल में हैं, मोबाइल ट्रेडिंग ऐप्स और कम लागत वाले ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए तेजी से शेयर बाजार में कदम रख रहे हैं।

यह घटना विशेष रूप से गुजरात के छोटे शहरों में स्पष्ट दिखती है, जहाँ स्थानीय युवाओं ने मात्र 18 महीनों में ही साधारण शुरुआत को भारी दौलत में बदल दिया है। एक चर्चित उदाहरण में, एक युवा ट्रेडर जिसके पास साइकिल तक नहीं थी, ने शेयर बाजार के मुनाफे से टोयोटा फॉर्च्यूनर एसयूवी खरीद ली।

विश्लेषक इस उछाल को आसान डिजिटल पहुँच, सोशल मीडिया से जुड़ी वित्तीय जागरूकता और छोटे शहरों के निवेशकों में बढ़ते जोखिम लेने के झुकाव का परिणाम मानते हैं। हालाँकि ये सफलता की कहानियाँ और अधिक युवाओं को बाजार की ओर खींच रही हैं, विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि इक्विटी में जोखिम भारी होता है और ऐसी तेज कमाई सबके लिए सुनिश्चित नहीं होती।
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