धर्म
गयाजी से पिंडदान करने पहुंचे लगभग दो लाख श्रद्धालु
गयाजी में बारिश में भी लगभग दो लाख श्रद्धालु पहुंचे पिंड दान करने लगी एक किलोमीटर लंबी कतार लगी
गयाजी से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
बारिश में भी नहीं डिगी पितृभक्ति, देवघाट पर एक किलोमीटर तक पिंडदानी; रिमझिम फुहारों के बीच पितरों के लिए कर्मकांड, दो लाख तीर्थ यात्री आए
पितृपक्ष मेला शुरू हो चुका है। पहले ही दिन गया जी की धरती पर आस्था का बड़ा नजारा दिखा। करीब दो लाख तीर्थ यात्री पहले दिन आ चुके हैं। फल्गु नदी के देवघाट पर सुबह से ही पिंडदानियों की भीड़ उमड़ पड़ी है। करीब एक किलोमीटर तक लोग पिंडदान करते नजर आ रहे हैं। कोई अपने माता-पिता के लिए कर्मकांड कर रहा है, तो कोई दादा-दादी और नाना-नानी के लिए। खास बात यह रही कि सुबह से बारिश होती रही। कभी रिमझिम फुहार पड़ी, तो कभी तेज बारिश हुई। इसके बावजूद पिंडदानियों के कदम नहीं रुक रहे। बारिश के बीच लोग फल्गु नदी के तट पर बैठकर विधि-विधान से पिंडदान करते नजर आ रहे।
बारिश एक तरफ थी और आस्था दूसरी तरफ। भीगे कपड़ों और गीली जमीन के बीच भी श्रद्धालुओं के चेहरे पर पितरों के लिए कर्मकांड पूरा करने का भाव साफ दिख रहा है। कई परिवार दूर-दराज के राज्यों से यहां पहुंचे हैं। कोई राजस्थान से आया है, तो कोई छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार पितृपक्ष के पहले दिन फल्गु नदी के तट पर पिंडदान का विशेष महत्व है। यही वजह है कि पहले दिन देवघाट पर सबसे ज्यादा भीड़ नजर आई। पिंडदानी अपने साथ पूजा सामग्री लेकर पहुंचे। पुरोहितों के निर्देश पर कर्मकांड शुरू किया।
राजस्थान के अलवर से आए राजेश कुमार पारिक अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए पिंडदान करने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पहले खीर से पिंडदान की शुरुआत होती है। इसके बाद पुरोहित के बताए अनुसार कर्मकांड पूरा किया जाता है।
छत्तीसगढ़ के शक्ति से आए अशोक बंसल का परिवार भी देवघाट पहुंचा है। उन्होंने बताया कि परिवार में करीब 102 साल बाद ऐसा मौका आया है। इस बार परिवार के 14 पूर्वजों का पिंडदान करने का सौभाग्य मिला है। परिवार के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा विशेष पल है।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से आईं सरिता अग्रवाल भी अपने सास-ससुर और परिवार के अन्य बड़े लोगों के पिंडदान के लिए गया जी पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह बचपन में भी गया जी आ चुकी हैं। इस बार पितरों के लिए पिंडदान करने का मौका मिला है।
देवघाट पर पिंडदान के साथ ही आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी है। बारिश से रास्ते और जमीन गीली रही। इसके बावजूद लोग कर्मकांड पूरा करने में जुटे हैं। प्रशासन और नगर निगम की टीमें भी व्यवस्थाओं में लगी रहीं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सफाई और आवाजाही पर नजर रखी गई है।
तीर्थ पुरोहित / गयापाल पंडा — गजाधर लाल कटारिया
अभी तक यात्रियों का आना कम से कम 2 लाख के ऊपर हो गया है। बहुत सारे पितृ भक्त अपना पितृ कार्य करने के लिए गयाजी आए हैं। सबकी श्रद्धा और भक्ति रहती है कि हमारे भी पितरों का मोक्ष हो। आज फल्गुनी तीर्थ का श्राद्ध है। गयाजी तीर्थ में आज इनकी महिमा अपरंपार है। यह भगवान विष्णु की नगरी है, यहाँ गयासुर, धर्मशिला, गयापाल पुरोहितों और भगवान विष्णु का संगम है। गयाजी तीर्थों में श्रेष्ठ है। यहां जब लोग श्राद्ध करते हैं, तो उन्हें पुत्र होने का गौरव प्राप्त होता है।
बारिश में भी नहीं डिगी पितृभक्ति, देवघाट पर एक किलोमीटर तक पिंडदानी; रिमझिम फुहारों के बीच पितरों के लिए कर्मकांड, दो लाख तीर्थ यात्री आए
पितृपक्ष मेला शुरू हो चुका है। पहले ही दिन गया जी की धरती पर आस्था का बड़ा नजारा दिखा। करीब दो लाख तीर्थ यात्री पहले दिन आ चुके हैं। फल्गु नदी के देवघाट पर सुबह से ही पिंडदानियों की भीड़ उमड़ पड़ी है। करीब एक किलोमीटर तक लोग पिंडदान करते नजर आ रहे हैं। कोई अपने माता-पिता के लिए कर्मकांड कर रहा है, तो कोई दादा-दादी और नाना-नानी के लिए। खास बात यह रही कि सुबह से बारिश होती रही। कभी रिमझिम फुहार पड़ी, तो कभी तेज बारिश हुई। इसके बावजूद पिंडदानियों के कदम नहीं रुक रहे। बारिश के बीच लोग फल्गु नदी के तट पर बैठकर विधि-विधान से पिंडदान करते नजर आ रहे।
बारिश एक तरफ थी और आस्था दूसरी तरफ। भीगे कपड़ों और गीली जमीन के बीच भी श्रद्धालुओं के चेहरे पर पितरों के लिए कर्मकांड पूरा करने का भाव साफ दिख रहा है। कई परिवार दूर-दराज के राज्यों से यहां पहुंचे हैं। कोई राजस्थान से आया है, तो कोई छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार पितृपक्ष के पहले दिन फल्गु नदी के तट पर पिंडदान का विशेष महत्व है। यही वजह है कि पहले दिन देवघाट पर सबसे ज्यादा भीड़ नजर आई। पिंडदानी अपने साथ पूजा सामग्री लेकर पहुंचे। पुरोहितों के निर्देश पर कर्मकांड शुरू किया।
राजस्थान के अलवर से आए राजेश कुमार पारिक अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए पिंडदान करने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पहले खीर से पिंडदान की शुरुआत होती है। इसके बाद पुरोहित के बताए अनुसार कर्मकांड पूरा किया जाता है।
छत्तीसगढ़ के शक्ति से आए अशोक बंसल का परिवार भी देवघाट पहुंचा है। उन्होंने बताया कि परिवार में करीब 102 साल बाद ऐसा मौका आया है। इस बार परिवार के 14 पूर्वजों का पिंडदान करने का सौभाग्य मिला है। परिवार के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा विशेष पल है।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से आईं सरिता अग्रवाल भी अपने सास-ससुर और परिवार के अन्य बड़े लोगों के पिंडदान के लिए गया जी पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह बचपन में भी गया जी आ चुकी हैं। इस बार पितरों के लिए पिंडदान करने का मौका मिला है।
देवघाट पर पिंडदान के साथ ही आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी है। बारिश से रास्ते और जमीन गीली रही। इसके बावजूद लोग कर्मकांड पूरा करने में जुटे हैं। प्रशासन और नगर निगम की टीमें भी व्यवस्थाओं में लगी रहीं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सफाई और आवाजाही पर नजर रखी गई है।
तीर्थ पुरोहित / गयापाल पंडा — गजाधर लाल कटारिया
अभी तक यात्रियों का आना कम से कम 2 लाख के ऊपर हो गया है। बहुत सारे पितृ भक्त अपना पितृ कार्य करने के लिए गयाजी आए हैं। सबकी श्रद्धा और भक्ति रहती है कि हमारे भी पितरों का मोक्ष हो। आज फल्गुनी तीर्थ का श्राद्ध है। गयाजी तीर्थ में आज इनकी महिमा अपरंपार है। यह भगवान विष्णु की नगरी है, यहाँ गयासुर, धर्मशिला, गयापाल पुरोहितों और भगवान विष्णु का संगम है। गयाजी तीर्थों में श्रेष्ठ है। यहां जब लोग श्राद्ध करते हैं, तो उन्हें पुत्र होने का गौरव प्राप्त होता है।