🔥 TRENDING ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह_ जलदाय एव... बेतिया नगर निगम प्रशासन ने शहरी क्षेत्... અંબાજીમાં Talod મહાદેવ ટ્રસ્ટ દ્વારા ભ... Bihar Becomes First Indian State to La... बीड़ में डॉ. बी.आर. अंबेडकर भवन के निर... Accused in Manji Sahib Shooting Dies i...
03 Nov 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
Lifestyle

गयाजी जिला के मारूफगंज के रहने वाली अनवर रिजवान ने कबूतरों के इश्क में जिनगी गुजार दिया

✍️ Reporter: Awanish Kumar 🗓 03 Nov 2026, 01:43 PM 👁 23
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

गयाजी जिला के मारूफगंज के रहने वाले अनवर रिजवान ने कबूतरों के इश्क में अपनी जिंदगी गुजार दिया सालाना लाखों खर्च फिर भी कम नहीं हुआ शौक

गयाजी से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट

कबूतरों के इश्क में जिंदगी गुजार दी, सालाना लाखों खर्च फिर भी नहीं कम हुआ शौक; गया के ‘पीजन मैन’ अनवर रिजवान की अनोखी कहानी

500 कबूतरों के हैं मालिक, सऊदी अरब, पाकिस्तान और भारत की दुर्लभ नस्लें मौजूद; नेशनल स्तर पर उस्तादी कप में रहे रनरअप

गया। कभी कबूतर संदेश पहुंचाने का सबसे भरोसेमंद माध्यम हुआ करते थे, लेकिन आज भी कुछ लोगों के लिए ये परिंदे जुनून और मोहब्बत की पहचान बने हुए हैं। ऐसे ही कबूतर प्रेमी हैं गया के मारूफगंज निवासी 58 वर्षीय अनवर रिजवान उर्फ अन्नू, जिन्हें लोग ‘पीजन मैन’ के नाम से जानते हैं।

अनवर रिजवान के पास करीब 500 कबूतर हैं। इनमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और भारत की कई दुर्लभ नस्लें शामिल हैं। बनारसी, इलाहाबादी, शाहजहांपुरी, कमगर, टैडी और गिरेहबाज के अलावा अमरसरे नस्ल का हरे-लाल रंग का आकर्षक कबूतर भी उनके पास मौजूद है।

13 साल की उम्र से शुरू हुआ शौक

रिजवान बताते हैं कि कबूतर पालने का शौक उन्हें 13-14 साल की उम्र में लगा था। ननिहाल से कुछ कबूतर लेकर आए थे। धीरे-धीरे यह शौक जुनून बन गया। आज चार दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी कबूतरों के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ है।

वे कबूतरों को पारंपरिक तरीके से ट्रेनिंग देते हैं। उनके कबूतर तीन से चार हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं और कई घंटे बाद अपने घर लौट आते हैं।

कबूतरों के भोजन पर लाखों खर्च

कबूतरों की सेहत और ताकत का विशेष ध्यान रखा जाता है। नियमित भोजन में रागी, चना, मक्का, बाजरा, सरसों और तीसी जैसे अनाज दिए जाते हैं। वहीं उड़ान प्रतियोगिता से पहले बादाम, काजू, किशमिश और हलवा खिलाया जाता है। पीने के लिए आरओ का पानी उपलब्ध कराया जाता है। 500 कबूतरों की देखभाल पर सालाना लाखों रुपये खर्च होते हैं।

कई प्रतियोगिताओं में जीत चुके हैं बाजी

अनवर रिजवान कबूतर उड़ान की करीब 15 प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर चुके हैं। बिहार-यूपी प्रतियोगिता में दो बार चैंपियन रहे हैं, जबकि नेशनल स्तर के उस्तादी कप में रनरअप का स्थान हासिल किया। जिला और राज्य स्तर पर भी कई प्रतियोगिताएं जीत चुके हैं।

बेटे की याद ने कबूतरों से और बढ़ाया लगाव

रिजवान बताते हैं कि उनके इकलौते बेटे की बीमारी से मौत हो गई थी। इस दुख से वे पूरी तरह टूट गए थे। ऐसे मुश्किल वक्त में कबूतरों के साथ ने उन्हें संभलने का सहारा दिया। आज यही परिंदे उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा हैं।

वे कहते हैं, शराब का नशा तो छूट सकता है, लेकिन कबूतरों का शौक जिंदगी भर नहीं छूटता। ये मेरे परिवार के सदस्य हैं। मरते दम तक इनका साथ निभाऊंगा।

बाइट अनवर रिजवान उर्फ अन्नू, कबूतर प्रेमी, गया।
📲Get App