स्थानीय
ग्वालियर के मोटे गणेश जी: 300-500 वर्ष पुरानी धार्मिक पहचान, भक्तों की अटूट आस्था
ग्वालियर के खासगी बाजार में स्थित मोटे गणेश जी का मंदिर शहर की सदियों पुरानी धार्मिक पहचान है। यहां विराजमान विशाल प्रतिमा को 300 से 500 वर्ष पुराना माना जाता है, जो भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है।
ग्वालियर के खासगी बाजार में विराजे मोटे गणेश जी का मंदिर शहर की एक पुरानी और महत्वपूर्ण धार्मिक पहचान है। यहां स्थापित विशाल गणेश प्रतिमा को विभिन्न स्रोतों द्वारा लगभग 300 से 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह प्रतिमा या तो राजस्थान के मेवाड़ से ग्वालियर लाई गई थी, या फिर पाटौर की खुदाई के दौरान जमीन से प्रकट हुई थी। प्रतिमा के विशाल उदर के कारण भक्त इन्हें स्नेह से 'मोटे गणेश जी' पुकारते हैं।
यह मंदिर ग्वालियर के महाराज बाड़ा के पास खासगी बाजार में स्थित है, जो शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में मंदिर की उपस्थिति व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के बीच गहरी आस्था का प्रतीक है।
विशेष रूप से बुधवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भक्तगण गणेश जी को दूर्वा और मोदक का भोग लगाते हैं। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए 11 बुधवार तक मंदिर की परिक्रमा करने की परंपरा का भी निर्वहन करते हैं। व्यापारियों में भी इस प्राचीन मंदिर के प्रति विशेष श्रद्धा देखी जाती है।
यह मंदिर ग्वालियर के महाराज बाड़ा के पास खासगी बाजार में स्थित है, जो शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में मंदिर की उपस्थिति व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के बीच गहरी आस्था का प्रतीक है।
विशेष रूप से बुधवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भक्तगण गणेश जी को दूर्वा और मोदक का भोग लगाते हैं। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए 11 बुधवार तक मंदिर की परिक्रमा करने की परंपरा का भी निर्वहन करते हैं। व्यापारियों में भी इस प्राचीन मंदिर के प्रति विशेष श्रद्धा देखी जाती है।