Sarkari Yojana
गांधी जयंती पर भी उपेक्षित रहा चन्द्रहिया का ऐतिहासिक स्थल
गांधी जयंती के अवसर पर भी उपेक्षित रहा चन्द्रहिया का ऐतिहासिक स्थल करोड़ो खर्च के बाद भी पार्क में उगे झाड़ी
मोतिहारी से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
2 अक्टूबर गांधी जयंती पर भी उपेक्षित रहा चंद्रहिया का ऐतिहासिक स्थल
करोड़ों खर्च के बाद भी पार्क में उगी झाड़ियां, बदहाल प्रतिमा और सफाई कमोतिहारी जिस चंपारण की धरती ने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी के रूप में पहचान दिलाई, उसी धरती पर गांधीजी से जुड़े ऐतिहासिक स्थल चंद्रहिया की उपेक्षा सामने आई है। गांधी जयंती के मौके पर भी चंद्रहिया स्थित गांधी पार्क में समुचित साफ-सफाई नहीं हो सकी। परिसर में जगह-जगह जंगल-झाड़ियां उगी हैं। गांधीजी की प्रतिमा पर किया गया पेंट भी कई जगह से उखड़ चुका है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। चंद्रहिया का इतिहास चंपारण सत्याग्रह से सीधे जुड़ा है। 15 अप्रैल को मोतिहारी पहुंचने के बाद गांधीजी 16 अप्रैल को जसौलीपट्टी के किसानों से मिलने जा रहे थे। इसी दौरान अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें चंपारण छोड़ने का आदेश दिया। गांधीजी चंद्रहिया में रुके और आदेश मानने से इनकार कर दिया। बाद में 18 अप्रैल को उन्हें मोतिहारी की अदालत में पेश किया गया। यही घटनाक्रम चंपारण सत्याग्रह के महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत बना। गांधीजी के चंपारण आगमन के सौ वर्ष पूरे होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चंद्रहिया से मोतिहारी गांधी मैदान तक पदयात्रा भी की थी। इसके बाद पर्यटन विभाग की ओर से करीब साढ़े 12 करोड़ रुपये की योजना से पार्क, कैफेटेरिया, संग्रहालय समेत कई निर्माण कार्य कराए गए। लेकिन रखरखाव के अभाव में परिसर की स्थिति लगातार खराब होती गई। भाजपा विधायक प्रमोद कुमार ने भी विभागीय उदासीनता के कारण स्थल की स्थिति खराब होने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि पर्यटन मंत्री रहते स्थल के विकास की योजना बनाई गई थी, लेकिन बाद में उचित रखरखाव नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांधीजी के नाम पर बड़े आयोजन करने के साथ उनकी विरासत को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। लोगों ने चंद्रहिया की तत्काल सफाई, जीर्णोद्धार और नियमित रखरखाव की व्यवस्था करने की मांग की है।
बाइट भाजपा विधायक प्रमोद कुमार
2 अक्टूबर गांधी जयंती पर भी उपेक्षित रहा चंद्रहिया का ऐतिहासिक स्थल
करोड़ों खर्च के बाद भी पार्क में उगी झाड़ियां, बदहाल प्रतिमा और सफाई कमोतिहारी जिस चंपारण की धरती ने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी के रूप में पहचान दिलाई, उसी धरती पर गांधीजी से जुड़े ऐतिहासिक स्थल चंद्रहिया की उपेक्षा सामने आई है। गांधी जयंती के मौके पर भी चंद्रहिया स्थित गांधी पार्क में समुचित साफ-सफाई नहीं हो सकी। परिसर में जगह-जगह जंगल-झाड़ियां उगी हैं। गांधीजी की प्रतिमा पर किया गया पेंट भी कई जगह से उखड़ चुका है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। चंद्रहिया का इतिहास चंपारण सत्याग्रह से सीधे जुड़ा है। 15 अप्रैल को मोतिहारी पहुंचने के बाद गांधीजी 16 अप्रैल को जसौलीपट्टी के किसानों से मिलने जा रहे थे। इसी दौरान अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें चंपारण छोड़ने का आदेश दिया। गांधीजी चंद्रहिया में रुके और आदेश मानने से इनकार कर दिया। बाद में 18 अप्रैल को उन्हें मोतिहारी की अदालत में पेश किया गया। यही घटनाक्रम चंपारण सत्याग्रह के महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत बना। गांधीजी के चंपारण आगमन के सौ वर्ष पूरे होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चंद्रहिया से मोतिहारी गांधी मैदान तक पदयात्रा भी की थी। इसके बाद पर्यटन विभाग की ओर से करीब साढ़े 12 करोड़ रुपये की योजना से पार्क, कैफेटेरिया, संग्रहालय समेत कई निर्माण कार्य कराए गए। लेकिन रखरखाव के अभाव में परिसर की स्थिति लगातार खराब होती गई। भाजपा विधायक प्रमोद कुमार ने भी विभागीय उदासीनता के कारण स्थल की स्थिति खराब होने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि पर्यटन मंत्री रहते स्थल के विकास की योजना बनाई गई थी, लेकिन बाद में उचित रखरखाव नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांधीजी के नाम पर बड़े आयोजन करने के साथ उनकी विरासत को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। लोगों ने चंद्रहिया की तत्काल सफाई, जीर्णोद्धार और नियमित रखरखाव की व्यवस्था करने की मांग की है।
बाइट भाजपा विधायक प्रमोद कुमार