📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Benjamin Nash, US Forest Service
शिक्षा
फ़ॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ने सिखिम में वन कर्मचारियों के लिए 3‑दिन का जियोस्पैशियल प्रशिक्षण शुरू किया
✍️ Sikkimexpress
🗓 08 सित. 2026, 09:37 AM
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फ़ॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एफ़टीआई) ने वन कर्मचारियों को आधुनिक जियोस्पैशियल तकनीक से लैस करने के लिए तीन‑दिन का प्रशिक्षण शुरू किया।
फ़ॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एफ़टीआई) ने सिखिम में वन के फ्रंटलाइन कर्मचारियों के लिए तीन‑दिन का जियोस्पैशियल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। यह पहल आधुनिक मानचित्रण और स्थानिक डेटा उपकरणों के उपयोग से वन प्रबंधन व निगरानी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उपग्रह इमेजरी की व्याख्या, जीआईएस सॉफ़्टवेयर का संचालन और फील्ड डेटा संग्रहण की तकनीकें सिखाई जाएँगी। व्यावहारिक अभ्यासों से वे सटीक वन आवरण मानचित्र बनाना, अवैध कटाई की पहचान करना और संरक्षण योजनाओं को समर्थन देना सीखेंगे।
यह कार्यक्रम सरकार के वन निगरानी को डिजिटल बनाकर डेटा‑आधारित निर्णय‑लेने की दिशा में उठाए गए व्यापक कदमों के साथ मेल खाता है। कोर्स समाप्त होने पर प्रशिक्षु अपने दैनिक कार्यों में जियोस्पैशियल जानकारी का उपयोग कर राज्य की वन सुरक्षा क्षमता को बढ़ाएंगे।
एफ़टीआई इस मॉडल को अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे सिखिम में देखे गए परिणामों के आधार पर भविष्य के मॉड्यूल को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उपग्रह इमेजरी की व्याख्या, जीआईएस सॉफ़्टवेयर का संचालन और फील्ड डेटा संग्रहण की तकनीकें सिखाई जाएँगी। व्यावहारिक अभ्यासों से वे सटीक वन आवरण मानचित्र बनाना, अवैध कटाई की पहचान करना और संरक्षण योजनाओं को समर्थन देना सीखेंगे।
यह कार्यक्रम सरकार के वन निगरानी को डिजिटल बनाकर डेटा‑आधारित निर्णय‑लेने की दिशा में उठाए गए व्यापक कदमों के साथ मेल खाता है। कोर्स समाप्त होने पर प्रशिक्षु अपने दैनिक कार्यों में जियोस्पैशियल जानकारी का उपयोग कर राज्य की वन सुरक्षा क्षमता को बढ़ाएंगे।
एफ़टीआई इस मॉडल को अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे सिखिम में देखे गए परिणामों के आधार पर भविष्य के मॉड्यूल को और बेहतर बनाया जा सकेगा।