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फर्रुखाबाद में गंगा-रामगंगा का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ का खतरा मंडराया

✍️ रिपोर्टर: शैलेष गुप्ता महाजन 🗓 29 सित. 2026, 10:43 PM 👁 15
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लगातार बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण फर्रुखाबाद में गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर फिर बढ़ गया है। गंगा चेतावनी बिंदु पर पहुंच गई है, जबकि रामगंगा खतरे के निशान से मात्र 5 सेंटीमीटर दूर है।

फर्रुखाबाद में बाढ़ का संकट एक बार फिर गहराने लगा है। बीते दिनों नदियों का जलस्तर घटने के बाद जब ग्रामीण इलाकों से पानी निकलने लगा था और हालात सामान्य होते दिखाई दे रहे थे, तभी लगातार हुई बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण गंगा और रामगंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ने लगा है। मंगलवार की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा का जलस्तर 136.60 मीटर तक पहुंच गया है, जो चेतावनी बिंदु है। वहीं, रामगंगा का जलस्तर 137.05 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान (137.10 मीटर) से केवल 5 सेंटीमीटर नीचे है।

नदियों के जलस्तर में वृद्धि का मुख्य कारण नरौरा बांध से छोड़ा गया 1,63,181 क्यूसेक पानी है, जिससे गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। इसके अतिरिक्त, रामगंगा में भी विभिन्न बैराजों से पानी छोड़ा गया है, जिसमें खो बैराज से 18,570 क्यूसेक, हरेली से 351 क्यूसेक और रामनगर बैराज से 8,798 क्यूसेक पानी शामिल है। इस पानी के बहाव से स्थानीय नदियों में जलस्तर बढ़ने की संभावना है।

नदियों का पानी बढ़ने के साथ ही गंगा और रामगंगा के किनारे बसे गांवों में एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। कई निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है और कुछ स्थानों पर सड़कों पर भी पानी दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों को दोबारा बाढ़ की स्थिति बनने की आशंका सता रही है। फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर स्पष्ट रूप से दिख रहा है, जहां कुछ दिन पहले पानी से बाहर आया पक्का घाट अब फिर से डूब गया है।

फिलहाल, रामगंगा का खतरे के निशान से मात्र 5 सेंटीमीटर दूर होना और गंगा का चेतावनी बिंदु तक पहुंचना सबसे बड़ी चिंता का विषय है। बैराजों से छोड़े जा रहे पानी और संभावित बारिश के बीच, प्रशासन के साथ-साथ नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों की भी नजरें जलस्तर पर टिकी हुई हैं।
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