फार्मर आई डी नही बनने के कारण किसान बीमा क्लेम से वंचित
नाचना नहरी क्षेत्र: जमीन ऑनलाइन न होने से अटकी किसानों की 'फार्मर आईडी', बीमा क्लेम से वंचित हो रहे अन्नदाता
नाचना (जैसलमेर)। नाचना नहरी क्षेत्र में राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटल अपडेट न होने का खामियाजा स्थानीय किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नहरी क्षेत्र की कृषि भूमियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज न होने के कारण सैकड़ों किसानों की 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) नहीं बन पा रही है, जिससे वे फसल बीमा योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं।
स्थानीय किसान भेराराम सुथार ने बताया कि नहरी क्षेत्र के आम किसान लगातार पटवार मंडलों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य की गई है, लेकिन जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन न होने से पोर्टल पर आवेदन रिजेक्ट हो जाता है। इस वजह से बैंक और बीमा कंपनियां किसानों की फसलों का बीमा क्लेम नहीं काट पा रही हैं।
मुख्य समस्याएं और किसानों का दर्द:
ऑनलाइन रिकॉर्ड की कमी: नहरी क्षेत्र के कई चक और जमीनों का रिकॉर्ड अभी भी ऑफलाइन (कागजी) है।
फसल बीमा से बेदखली: प्रीमियम राशि (बीमा क्लेम) न कट पाने के कारण प्राकृतिक आपदा या नुकसान की स्थिति में किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिल सकेगा।
सरकारी योजनाओं का अटकाव: फार्मर आईडी न बनने से बीमा क्लेम ही नहीं, बल्कि कृषि अनुदान और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में भी बाधा आ रही है।
किसान भेराराम सुथार और क्षेत्र के अन्य काश्तकारों ने प्रशासन व संबंधित राजस्व विभाग से जल्द से जल्द नहरी भूमि के रिकॉर्ड को ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करने की मांग की है, ताकि किसानों की फार्मर आईडी बन सके और वे समय रहते अपनी फसलों का बीमा करा सकें।
नाचना (जैसलमेर)। नाचना नहरी क्षेत्र में राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटल अपडेट न होने का खामियाजा स्थानीय किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नहरी क्षेत्र की कृषि भूमियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज न होने के कारण सैकड़ों किसानों की 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) नहीं बन पा रही है, जिससे वे फसल बीमा योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं।
स्थानीय किसान भेराराम सुथार ने बताया कि नहरी क्षेत्र के आम किसान लगातार पटवार मंडलों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य की गई है, लेकिन जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन न होने से पोर्टल पर आवेदन रिजेक्ट हो जाता है। इस वजह से बैंक और बीमा कंपनियां किसानों की फसलों का बीमा क्लेम नहीं काट पा रही हैं।
मुख्य समस्याएं और किसानों का दर्द:
ऑनलाइन रिकॉर्ड की कमी: नहरी क्षेत्र के कई चक और जमीनों का रिकॉर्ड अभी भी ऑफलाइन (कागजी) है।
फसल बीमा से बेदखली: प्रीमियम राशि (बीमा क्लेम) न कट पाने के कारण प्राकृतिक आपदा या नुकसान की स्थिति में किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिल सकेगा।
सरकारी योजनाओं का अटकाव: फार्मर आईडी न बनने से बीमा क्लेम ही नहीं, बल्कि कृषि अनुदान और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में भी बाधा आ रही है।
किसान भेराराम सुथार और क्षेत्र के अन्य काश्तकारों ने प्रशासन व संबंधित राजस्व विभाग से जल्द से जल्द नहरी भूमि के रिकॉर्ड को ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करने की मांग की है, ताकि किसानों की फार्मर आईडी बन सके और वे समय रहते अपनी फसलों का बीमा करा सकें।