📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
वायरल
फैक्ट चेक: मोदी का सी जिंपिंग को पोर्ट्रेट देने का वीडियो पुराना, गलत रूप से वायरल
✍️ Alt News
🗓 13 सित. 2026, 07:50 PM
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प्राइम मिनिस्टर मोदी के चीनी राष्ट्रपति सी जिंपिंग को अपना पोर्ट्रेट देने का दावा करते हुए एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर गलत रूप से वायरल हो रहा है। फैक्ट-चेक में पता चला कि यह क्लिप किसी पुराने कार्यक्रम की है और हाल की कोई घटना नहीं दर्शाता।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति सी जिंपिंग को अपना पोर्ट्रेट उपहार में दिया है। इस वीडियो को गलत कैप्शन के साथ साझा किया जा रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि यह कोई हाल की कूटनीतिक घटना है।
हालाँकि, फैक्ट-चेकरों ने इस फुटेज को एक पुराने वीडियो के रूप में पहचाना है, जो किसी पिछली मुलाकात से संबंधित है। यह दृश्य दोनों नेताओं के बीच हाल ही में हुए किसी भी आधिकारिक विनिमय या घोषणा से मेल नहीं खाता है।
वायरल पोस्ट में संदर्भ (context) की कमी है, जिससे कई उपयोगकर्ताओं को यह लग रहा है कि यह भारत-चीन संबंधों में एक नया विकास है। डिजिटल साक्षरता विशेषज्ञों की सलाह है कि इस तरह के वीडियो साझा करने से पहले उनका स्रोत और तारीख ज़रूर सत्यापित करें ताकि गलत जानकारी फैलने से बचा जा सके।
यह घटना उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के दौरान पुराने वीडियो को गलत नैरटिव के साथ फिर से उपयोग किए जाने की समस्या को रेखांकित करती है। उपयोगकर्ताओं से अनुरोध है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़ी सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी चैनलों पर भरोसा करें।
हालाँकि, फैक्ट-चेकरों ने इस फुटेज को एक पुराने वीडियो के रूप में पहचाना है, जो किसी पिछली मुलाकात से संबंधित है। यह दृश्य दोनों नेताओं के बीच हाल ही में हुए किसी भी आधिकारिक विनिमय या घोषणा से मेल नहीं खाता है।
वायरल पोस्ट में संदर्भ (context) की कमी है, जिससे कई उपयोगकर्ताओं को यह लग रहा है कि यह भारत-चीन संबंधों में एक नया विकास है। डिजिटल साक्षरता विशेषज्ञों की सलाह है कि इस तरह के वीडियो साझा करने से पहले उनका स्रोत और तारीख ज़रूर सत्यापित करें ताकि गलत जानकारी फैलने से बचा जा सके।
यह घटना उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के दौरान पुराने वीडियो को गलत नैरटिव के साथ फिर से उपयोग किए जाने की समस्या को रेखांकित करती है। उपयोगकर्ताओं से अनुरोध है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़ी सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी चैनलों पर भरोसा करें।