📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
रक्षा
पूर्व परमाणु प्रमुख: अमेरिका का परमाणु परीक्षण डिटेक्शन अभियान हावीयता की कोशिश
✍️ TOI India
🗓 06 अक्टू. 2026, 08:40 AM
👁 23
भारत के पूर्व परमाणु प्रमुख अनील काकोड़कर ने कहा कि अमेरिका का यह गैर-प्रसार प्रयोग परमाणु हावीयता बनाए रखने और अन्य देशों को परीक्षण से रोकने की कोशिश है।
भारत के पूर्व परमाणु प्रमुख अनील काकोड़कर ने हाल ही में अमेरिका द्वारा किए गए एक प्रयोग की आलोचना की है। उन्होंने इसे अमेरिका की परमाणु हावीयता (hegemony) को बनाए रखने की कोशिश बताया। अमेरिका ने इस प्रयोग को गैर-प्रसार (non-proliferation) के तहत किया, जिसका उद्देश्य परमाणु विस्फोटों की पहचान करने की अपनी क्षमता को बेहतर बनाना था।
काकोड़कर के अनुसार, इस कदम का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका परमाणु क्षेत्र में अपनी प्रमुख स्थिति बनाए रखे। उन्होंने दावा किया कि डिटेक्शन क्षमताओं को बढ़ाकर वाशिंगटन अन्य देशों को अपने परमाणु परीक्षणों से रोकना चाहता है।
राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन (NNSA) ने स्पष्ट किया कि इस प्रयोग में बेहतर डिटेक्शन के लिए उन्नत सेंसर माप (advanced sensor measurements) का उपयोग किया गया। ये तकनीकें वैश्विक स्तर पर परमाणु विस्फोटों की पहचान और विश्लेषण में सटीकता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
यह वक्तव्य तब आया है जब अमेरिकी वैज्ञानिकों की संस्था 'फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स' ने भारत के परमाणु हेड्स की स्थिति और क्षमताओं पर रिपोर्ट जारी की थी। काकोड़कर की टिप्पणी परमाणु पारदर्शिता और बड़ी शक्तियों की रणनीतिक रुचियों के इर्द-गिर्द राजनीतिक तनाव को उजागर करती है।
काकोड़कर के अनुसार, इस कदम का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका परमाणु क्षेत्र में अपनी प्रमुख स्थिति बनाए रखे। उन्होंने दावा किया कि डिटेक्शन क्षमताओं को बढ़ाकर वाशिंगटन अन्य देशों को अपने परमाणु परीक्षणों से रोकना चाहता है।
राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन (NNSA) ने स्पष्ट किया कि इस प्रयोग में बेहतर डिटेक्शन के लिए उन्नत सेंसर माप (advanced sensor measurements) का उपयोग किया गया। ये तकनीकें वैश्विक स्तर पर परमाणु विस्फोटों की पहचान और विश्लेषण में सटीकता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
यह वक्तव्य तब आया है जब अमेरिकी वैज्ञानिकों की संस्था 'फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स' ने भारत के परमाणु हेड्स की स्थिति और क्षमताओं पर रिपोर्ट जारी की थी। काकोड़कर की टिप्पणी परमाणु पारदर्शिता और बड़ी शक्तियों की रणनीतिक रुचियों के इर्द-गिर्द राजनीतिक तनाव को उजागर करती है।