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09 अग. 2026
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एवं हलवाई जाति को एक करने के प्रयास का कानू विकास संघ बिहार ने किया विरोध

✍️ रिपोर्टर: shubham nath 🗓 09 अग. 2026, 06:38 PM 👁 24
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विकास संघ बिहार, पटना जिला शाखा समिति की बैठक में कानू एवं हलवाई जाति की स्वतंत्र सामाजिक पहचान को एक करने के प्रयासों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों एवं समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि सामाजिक सद्भाव में दो अलग सामाजिक पहचान को बिना पर्याप्त ऐतिहासिक, सामाजिक एवं प्रमाणिक आधार के एक घोषित करना उचित नहीं होता।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कानू समाज किसी जाति या समुदाय के विरुद्ध नहीं है। लेकिन कानू समाज की अपनी स्वतंत्र सामाजिक पहचान, इतिहास एवं संगठनात्मक अस्तित्व है, जिसकी रक्षा करना समाज और उसके नेतृत्व कानू विकास संघ बिहार की जिम्मेदारी है।

वक्ताओं ने कहा कि आपसी संबंध, विवाह, धार्मिक आस्था, सामाजिक मेल-जोल अथवा कुछ समान परंपराएँ अपने-आप में किसी दो समुदायों की जातीय पहचान को एक जाति सिद्ध नहीं करतीं। किसी भी जातीय पहचान के संबंध में निर्णय भावनात्मक आधार पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेज, सामाजिक प्रमाण और आधिकारिक अभिलेखों के तथ्यात्मक अध्ययन के आधार पर होना चाहिए।

बैठक में यह भी कहा गया कि किसी व्यक्ति अथवा कानू के किसी एक के नेता के व्यक्तिगत निर्णय को पूरे समुदाय की निर्णय का आधार नहीं बनाया जा सकता। इसी प्रकार किसी एक-दो उदाहरण के आधार पर पूरे कानू समाज अथवा हलवाई समाज की सामाजिक पहचान निर्धारित करना भी उचित नहीं है।

अध्ययन एवं प्रमाण-आधारित पहल की मांग

कानू विकास संघ बिहार की पटना जिला शाखा ने मांग की कि इस विषय पर निष्पक्ष एवं प्रमाण-आधारित अध्ययन कराया जाए। इसके लिए इतिहास, सामाजिक संरचना एवं उपलब्ध सरकारी अभिलेखों के जानकारों की एक समिति गठित कर तथ्यों का संकलन एवं परीक्षण किया जाए।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि कहीं सरकारी अथवा सामाजिक अभिलेखों में कानू जाति की पहचान को लेकर कोई भ्रम, गलत प्रस्तुति या अनावश्यक विलय दिखाई देता है, तो उसे प्रमाण सहित बिहार सरकार के समक्ष लिखित, धरना, प्रर्दशन, आंदोलन में पटना जिला कमिटी अग्रणी भूमिका निभाने का वचन अपने प्रदेश कमिटी को दिया जाता है।


बैठक में सर्वसम्मति से यह संदेश दिया गया कि—

“हम कानू सामाज की स्वतंत्र सामाजिक पहचान और अधिकार की कीमत पर हम एकता स्वीकार नहीं कर सकते।”

कानू विकास संघ बिहार ने समाज के सभी लोगों से अपील की कि इस संवेदनशील विषय पर अभद्र भाषा, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप एवं किसी समुदाय के प्रति अपमानजनक टिप्पणी से बचें। अपनी बात तथ्यों, प्रमाणों और लोकतांत्रिक तरीके से रखी जाए।

बैठक में कहा गया कि कानू समाज किसी के विरुद्ध नहीं है, लेकिन अपनी पहचान, सम्मान और सामाजिक अस्तित्व के प्रति सजग है
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