Health
एम्स पटना में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
एम्स पटना में चिकित्सा अनुसंधान पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
एम्स पटना से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
एम्स पटना में चिकित्सा अनुसंधान पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
बिहार के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के 30 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा; वैज्ञानिक शोध के आधार पर बेहतर इलाज के लिए दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
पटना, 25 अक्टूबर 2026
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना के जैव रसायन विभाग ने एम्स देवघर के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तकनीकी संसाधन केंद्र के सहयोग से 23 और 24 अक्टूबर को चिकित्सा अनुसंधान पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें बिहार के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना और डॉक्टरों को शोध के निष्कर्षों के आधार पर बेहतर उपचार संबंधी निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित करना था।
कार्यशाला का आयोजन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया गया। जैव रसायन विभाग की अध्यक्ष प्रो. साधना शर्मा आयोजन अध्यक्ष तथा एम्स देवघर के डीएचआर-टीआरसी के प्रधान अन्वेषक डॉ. शेषाद्रि रेड्डी वरिकासुवु आयोजन सचिव थे।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक शोध को समझने, विभिन्न शोधों के निष्कर्षों की तुलना करने और उनकी विश्वसनीयता का आकलन करने की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने शोध के लिए सही प्रश्न तैयार करने, संबंधित वैज्ञानिक जानकारियां जुटाने, शोध की योजना बनाने, आंकड़ों का विश्लेषण करने तथा शोध के परिणामों को समझने के तरीके बताए। प्रतिभागियों को इन विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया जिससे वे चिकित्सा अनुसंधान में इन पद्धतियों का बेहतर उपयोग कर सकें।
कार्यशाला में एम्स देवघर के डॉ. शेषाद्रि रेड्डी वरिकासुवु, एम्स नई दिल्ली की क्लिनिकल रिसर्च यूनिट के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के डॉ. विकास धिकाव ने विशेषज्ञ के रूप में योगदान दिया। उन्होंने वैज्ञानिक शोध की गुणवत्ता परखने और उसके निष्कर्षों को चिकित्सा के क्षेत्र में उपयोग करने के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यशाला का एक प्रमुख विषय ग्रेड पद्धति भी रहा। इस पद्धति की मदद से यह आकलन किया जाता है कि किसी बीमारी के इलाज या चिकित्सा संबंधी निर्णय के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण कितने विश्वसनीय हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण के माध्यम से किसी विषय पर उपलब्ध विभिन्न शोधों के निष्कर्षों को एक साथ समझा जा सकता है। इससे उपचार संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करने और मरीजों के इलाज से जुड़े फैसलों को वैज्ञानिक आधार देने में मदद मिलती है।
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि चिकित्सा के क्षेत्र में केवल अनुभव ही नहीं बल्कि विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण भी महत्वपूर्ण हैं। शोध के निष्कर्षों का सही आकलन डॉक्टरों को उपचार के बेहतर विकल्प चुनने और मरीजों को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
इस पहल से बिहार के चिकित्सा संस्थानों में अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने, डॉक्टरों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। एम्स पटना की यह पहल चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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एम्स पटना में चिकित्सा अनुसंधान पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
बिहार के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के 30 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा; वैज्ञानिक शोध के आधार पर बेहतर इलाज के लिए दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
पटना, 25 अक्टूबर 2026
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना के जैव रसायन विभाग ने एम्स देवघर के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तकनीकी संसाधन केंद्र के सहयोग से 23 और 24 अक्टूबर को चिकित्सा अनुसंधान पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें बिहार के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना और डॉक्टरों को शोध के निष्कर्षों के आधार पर बेहतर उपचार संबंधी निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित करना था।
कार्यशाला का आयोजन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया गया। जैव रसायन विभाग की अध्यक्ष प्रो. साधना शर्मा आयोजन अध्यक्ष तथा एम्स देवघर के डीएचआर-टीआरसी के प्रधान अन्वेषक डॉ. शेषाद्रि रेड्डी वरिकासुवु आयोजन सचिव थे।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक शोध को समझने, विभिन्न शोधों के निष्कर्षों की तुलना करने और उनकी विश्वसनीयता का आकलन करने की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने शोध के लिए सही प्रश्न तैयार करने, संबंधित वैज्ञानिक जानकारियां जुटाने, शोध की योजना बनाने, आंकड़ों का विश्लेषण करने तथा शोध के परिणामों को समझने के तरीके बताए। प्रतिभागियों को इन विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया जिससे वे चिकित्सा अनुसंधान में इन पद्धतियों का बेहतर उपयोग कर सकें।
कार्यशाला में एम्स देवघर के डॉ. शेषाद्रि रेड्डी वरिकासुवु, एम्स नई दिल्ली की क्लिनिकल रिसर्च यूनिट के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के डॉ. विकास धिकाव ने विशेषज्ञ के रूप में योगदान दिया। उन्होंने वैज्ञानिक शोध की गुणवत्ता परखने और उसके निष्कर्षों को चिकित्सा के क्षेत्र में उपयोग करने के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यशाला का एक प्रमुख विषय ग्रेड पद्धति भी रहा। इस पद्धति की मदद से यह आकलन किया जाता है कि किसी बीमारी के इलाज या चिकित्सा संबंधी निर्णय के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण कितने विश्वसनीय हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण के माध्यम से किसी विषय पर उपलब्ध विभिन्न शोधों के निष्कर्षों को एक साथ समझा जा सकता है। इससे उपचार संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करने और मरीजों के इलाज से जुड़े फैसलों को वैज्ञानिक आधार देने में मदद मिलती है।
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि चिकित्सा के क्षेत्र में केवल अनुभव ही नहीं बल्कि विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण भी महत्वपूर्ण हैं। शोध के निष्कर्षों का सही आकलन डॉक्टरों को उपचार के बेहतर विकल्प चुनने और मरीजों को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
इस पहल से बिहार के चिकित्सा संस्थानों में अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने, डॉक्टरों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। एम्स पटना की यह पहल चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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