📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sir Charles Alfred Bell (1870-1945)
देश
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की स्वीकार्यता के लिए वैध प्रमाण पत्र आवश्यक: अदालत का फैसला
✍️ Live Law
🗓 29 जून 2026, 02:01 PM
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एक भारतीय अदालत ने फैसला सुनाया है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संपादित नहीं किया गया है, यह दावा उसकी स्वीकार्यता के लिए पर्याप्त नहीं है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत एक वैध प्रमाण पत्र अनिवार्य है।
हालिया न्यायिक फैसले ने इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की स्वीकार्यता कानूनी प्रक्रियाओं के सख्त अनुपालन पर निर्भर करती है। डिजिटल दस्तावेज़ या डेटा के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है, यह किसी भी पक्ष का सामान्य दावा कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
यह फैसला स्पष्ट करता है कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में माने जाने के लिए, इसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 65बी के तहत निर्दिष्ट एक वैध प्रमाण पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह प्रमाण पत्र इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और अखंडता को प्रमाणित करता है।
यह कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करता है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य विश्वसनीय हैं और उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे कानूनी कार्यवाही की निष्पक्षता सुरक्षित रहती है। अदालत के इस निर्णय ने डिजिटल साक्ष्य को स्वीकार करने में प्रक्रियात्मक अनुपालन के महत्व को और मजबूत किया है।
यह फैसला स्पष्ट करता है कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में माने जाने के लिए, इसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 65बी के तहत निर्दिष्ट एक वैध प्रमाण पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह प्रमाण पत्र इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और अखंडता को प्रमाणित करता है।
यह कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करता है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य विश्वसनीय हैं और उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे कानूनी कार्यवाही की निष्पक्षता सुरक्षित रहती है। अदालत के इस निर्णय ने डिजिटल साक्ष्य को स्वीकार करने में प्रक्रियात्मक अनुपालन के महत्व को और मजबूत किया है।