📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Defence
रक्षा
DRDO ने आंध्र प्रदेश व पश्चिम बंगाल में मिसाइल परीक्षण सुविधाएँ स्थापित करने का फैसला
✍️ Defence.in
🗓 13 सित. 2026, 11:31 PM
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डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन ने आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में नई मिसाइल परीक्षण सुविधाओं के निर्माण की योजना बताई, जो फेज‑II बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और अन्य हथियार परीक्षणों को समर्थन देगा।
डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में विशेष मिसाइल परीक्षण स्थलों के निर्माण को मंजूरी दी है। ये सुविधाएँ फेज‑II बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के हथियार परीक्षणों को समर्थन देने के लिए तैयार की जाएँगी।
प्रत्येक साइट में लॉन्च पैड, उच्च‑सटीकता ट्रैकिंग रडार, टेलीमेट्री स्टेशन और डेटा अधिग्रहण प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे आधुनिक मिसाइल वैधता परीक्षण संभव हो सकेगा। घरेलू परीक्षण स्थलों की स्थापना से विदेशी रेंजों पर निर्भरता घटेगी और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास में गति आएगी।
यह कदम सरकार की "आत्मनिर्भर भारत" रक्षा पहल के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य स्वायत्तता और परिचालन तत्परता को बढ़ाना है। जबकि विस्तृत समय‑सीमा और बजट का उल्लेख नहीं किया गया, अधिकारियों ने बताया कि ये परियोजनाएँ BMD कार्यक्रम के मौजूदा चरणों के साथ समन्वय में आगे बढ़ेंगी।
विश्लेषकों का मानना है कि नई रेंजें भविष्य में हाइपरसोनिक और निर्देशित‑ऊर्जा हथियारों के परीक्षण के लिए भी उपयोगी साबित होंगी, जिससे ओडिशा और लद्दाख में मौजूदा सुविधाओं से परे भारत की रणनीतिक परीक्षण बुनियादी ढाँचा विस्तारित होगा।
प्रत्येक साइट में लॉन्च पैड, उच्च‑सटीकता ट्रैकिंग रडार, टेलीमेट्री स्टेशन और डेटा अधिग्रहण प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे आधुनिक मिसाइल वैधता परीक्षण संभव हो सकेगा। घरेलू परीक्षण स्थलों की स्थापना से विदेशी रेंजों पर निर्भरता घटेगी और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास में गति आएगी।
यह कदम सरकार की "आत्मनिर्भर भारत" रक्षा पहल के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य स्वायत्तता और परिचालन तत्परता को बढ़ाना है। जबकि विस्तृत समय‑सीमा और बजट का उल्लेख नहीं किया गया, अधिकारियों ने बताया कि ये परियोजनाएँ BMD कार्यक्रम के मौजूदा चरणों के साथ समन्वय में आगे बढ़ेंगी।
विश्लेषकों का मानना है कि नई रेंजें भविष्य में हाइपरसोनिक और निर्देशित‑ऊर्जा हथियारों के परीक्षण के लिए भी उपयोगी साबित होंगी, जिससे ओडिशा और लद्दाख में मौजूदा सुविधाओं से परे भारत की रणनीतिक परीक्षण बुनियादी ढाँचा विस्तारित होगा।