📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Department of Archaeology & Museums, Government of
बिज़नेस
केकड़ी के कुम्हारों पर दीपावली में सजावटी लाइटों की बढ़ती मांग से असर
✍️ Amar Ujala · Ajmer
🗓 06 नव. 2026, 03:31 PM
👁 17
दीपावली के करीब आते ही केकड़ी में सजावटी लाइटों की मांग बढ़ने से मिट्टी के दीयों के कुम्हारों को बिक्री में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्थान के अजमेर जिले के केकड़ी में दीपावली की तैयारियों के साथ बाजार में रंग‑बिरंगी बिजली की लाइटों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, जबकि पारंपरिक मिट्टी के दीयों की खरीद में गिरावट देखी जा रही है।
केकड़ी के कुम्हारों ने बताया कि इस साल दीयों के ऑर्डर पिछले साल की तुलना में काफी कम हो गए हैं। कई कार्यशालाएँ जो पहले रोज़ाना दर्जनों दीये बनाती थीं, अब उसी उत्पादन को बनाए रखने में असमर्थ हैं और उत्पादन घटा दिया है।
इस गिरावट का सीधा असर कुम्हारों के परिवारों की आय पर पड़ रहा है, क्योंकि दीपावली के मौसम में दीयों की बिक्री उनके वार्षिक आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कुम्हार नई संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं, जैसे सजावटी मिट्टी के बर्तन बनाना या सरकारी सहायता प्राप्त करना, पर अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं की चमकीली, पुन: उपयोग योग्य लाइटों की ओर झुकाव परंपरागत शिल्पों के भविष्य को बदल सकता है, यदि समय पर समर्थन न दिया जाए तो यह रुझान पूरे क्षेत्र में समान प्रभाव डाल सकता है।
केकड़ी के कुम्हारों ने बताया कि इस साल दीयों के ऑर्डर पिछले साल की तुलना में काफी कम हो गए हैं। कई कार्यशालाएँ जो पहले रोज़ाना दर्जनों दीये बनाती थीं, अब उसी उत्पादन को बनाए रखने में असमर्थ हैं और उत्पादन घटा दिया है।
इस गिरावट का सीधा असर कुम्हारों के परिवारों की आय पर पड़ रहा है, क्योंकि दीपावली के मौसम में दीयों की बिक्री उनके वार्षिक आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कुम्हार नई संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं, जैसे सजावटी मिट्टी के बर्तन बनाना या सरकारी सहायता प्राप्त करना, पर अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं की चमकीली, पुन: उपयोग योग्य लाइटों की ओर झुकाव परंपरागत शिल्पों के भविष्य को बदल सकता है, यदि समय पर समर्थन न दिया जाए तो यह रुझान पूरे क्षेत्र में समान प्रभाव डाल सकता है।