📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / KiraDhami
शिक्षा
धामी ने कहा: युवा को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की सामूहिक ज़िम्मेदारी
✍️ Pioneer Edge
🗓 21 सित. 2026, 05:36 AM
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सांस्कृतिक कार्यकर्ता धामी ने समाज से अपील की कि युवा को अपनी विरासत से जोड़ने में सामूहिक जिम्मेदारी निभाई जाए, शिक्षा और समुदाय की भूमिका पर ज़ोर दिया।
सांस्कृतिक टिप्पणीकार धामी ने भारत के युवा वर्ग को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से पुनः जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। धामी ने कहा कि परम्पराओं का संरक्षण केवल एक व्यक्ति या संस्था पर नहीं, बल्कि परिवार, स्कूल, सामुदायिक समूह और मीडिया की भागीदारी से संभव है।
शहरीकरण और डिजिटल मनोरंजन के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के कारण युवा परम्परागत कला, भाषा और रीति‑रिवाजों से दूर होते जा रहे हैं, इस चिंता को धामी ने उजागर किया। उन्होंने स्कूल पाठ्यक्रम में क्षेत्रीय इतिहास को शामिल करना, सामुदायिक कार्यशालाएँ आयोजित करना और पीढ़ियों के बीच कहानी‑सत्रों को बढ़ावा देना जैसे व्यावहारिक कदम सुझाए।
सांस्कृतिक निरंतरता को सामूहिक ज़िम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करके धामी का लक्ष्य युवा भारतीयों में गर्व और पहचान की भावना को सुदृढ़ करना है, ताकि प्राचीन परम्पराएँ आधुनिक समाज में भी जीवंत और प्रासंगिक बनी रहें।
शहरीकरण और डिजिटल मनोरंजन के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के कारण युवा परम्परागत कला, भाषा और रीति‑रिवाजों से दूर होते जा रहे हैं, इस चिंता को धामी ने उजागर किया। उन्होंने स्कूल पाठ्यक्रम में क्षेत्रीय इतिहास को शामिल करना, सामुदायिक कार्यशालाएँ आयोजित करना और पीढ़ियों के बीच कहानी‑सत्रों को बढ़ावा देना जैसे व्यावहारिक कदम सुझाए।
सांस्कृतिक निरंतरता को सामूहिक ज़िम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करके धामी का लक्ष्य युवा भारतीयों में गर्व और पहचान की भावना को सुदृढ़ करना है, ताकि प्राचीन परम्पराएँ आधुनिक समाज में भी जीवंत और प्रासंगिक बनी रहें।