📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Unknown authorUnknown author
सरकारी योजना
दिल्ली में बोतल रिटर्न योजना, उत्तराखंड और गोवा से मिली प्रेरणा
✍️ The Indian Express
🗓 27 अक्टू. 2026, 11:02 AM
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दिल्ली सरकार ने उत्तराखंड और गोवा की सफल योजनाओं को मॉडल बनाकर बोतल रिटर्न योजना शुरू करने की घोषणा की, जिससे रीसाइक्लिंग बढ़ेगी और कचरा कम होगा।
दिल्ली नगर निगम ने उत्तराखंड और गोवा में सफलतापूर्वक चल रही बोतल रिटर्न योजनाओं को मॉडल बनाकर राजधानी में समान योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत उपभोक्ता इस्तेमाल की गई प्लास्टिक और कांच की बोतलें निर्धारित संग्रह बिंदुओं पर लौटाकर छोटा रिफंड प्राप्त कर सकेंगे।
प्रस्तावित नियमों में खुदरा विक्रेताओं और विक्रय स्थलों को रिवर्स‑वेंडिंग मशीन या मैन्युअल बिन से सुसज्जित किया जाएगा, और जमा राशि को डिजिटल वॉलेट या नकद वाउचर के रूप में उपभोक्ता को दिया जाएगा। यह पहल मौजूदा कचरा पृथक्करण प्रणाली के साथ एकीकृत होगी, जिससे एकल‑उपयोग प्लास्टिक और कांच दोनों को कवर किया जा सकेगा।
उत्तराखंड और गोवा की योजनाओं ने कचरा पुनर्चक्रण दर बढ़ाने और सड़कों से कचरा हटाने में उल्लेखनीय सफलता पाई है, जिससे दिल्ली ने समान ढांचा अपनाने का निर्णय लिया। शहर का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में प्लास्टिक कचरे को 30% तक घटाना और पुनः प्राप्त सामग्री से नगरपालिका सेवाओं के लिए आय उत्पन्न करना है।
नगर निगम ने इस वर्ष के अंत में कुछ चयनित वार्डों में पायलट चरण शुरू करने की योजना बनाई है, जबकि पूरी दिल्ली में 2025 तक पूर्ण कार्यान्वयन का लक्ष्य रखा गया है, बशर्ते राज्य सरकार की मंजूरी और राष्ट्रीय कचरा‑प्रबंधन नीतियों के साथ तालमेल स्थापित हो।
प्रस्तावित नियमों में खुदरा विक्रेताओं और विक्रय स्थलों को रिवर्स‑वेंडिंग मशीन या मैन्युअल बिन से सुसज्जित किया जाएगा, और जमा राशि को डिजिटल वॉलेट या नकद वाउचर के रूप में उपभोक्ता को दिया जाएगा। यह पहल मौजूदा कचरा पृथक्करण प्रणाली के साथ एकीकृत होगी, जिससे एकल‑उपयोग प्लास्टिक और कांच दोनों को कवर किया जा सकेगा।
उत्तराखंड और गोवा की योजनाओं ने कचरा पुनर्चक्रण दर बढ़ाने और सड़कों से कचरा हटाने में उल्लेखनीय सफलता पाई है, जिससे दिल्ली ने समान ढांचा अपनाने का निर्णय लिया। शहर का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में प्लास्टिक कचरे को 30% तक घटाना और पुनः प्राप्त सामग्री से नगरपालिका सेवाओं के लिए आय उत्पन्न करना है।
नगर निगम ने इस वर्ष के अंत में कुछ चयनित वार्डों में पायलट चरण शुरू करने की योजना बनाई है, जबकि पूरी दिल्ली में 2025 तक पूर्ण कार्यान्वयन का लक्ष्य रखा गया है, बशर्ते राज्य सरकार की मंजूरी और राष्ट्रीय कचरा‑प्रबंधन नीतियों के साथ तालमेल स्थापित हो।