📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subeesh Balan സുഭീഷ് ബാലൻ
राजनीति
दिल्ली ने जंतर-मंतर से धरना स्थल बदल दिया, आठ साल बाद तीन नई जगहें घोषित
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 13 अक्टू. 2026, 12:16 PM
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आठ साल बाद जंतर-मंतर से दिल्ली ने धरना स्थल बदल कर तीन नई जगहों को तय किया, सुरक्षा और व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए।
जंतर-मंतर, जो कई वर्षों से दिल्ली में बड़े पैमाने पर धरना‑प्रदर्शन का केंद्र रहा, अब मुख्य स्थल नहीं रहेगा। आठ साल की निरंतर उपयोग के बाद, नगर निगम ने राजधानी के भीतर तीन वैकल्पिक स्थानों को भविष्य के धरने और रैलियों के लिए निर्धारित किया है।
दिल्ली प्रशासन ने यह कदम भीड़ प्रबंधन, ट्रैफ़िक जाम और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए उठाया है, जो जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले सभाओं से बढ़ती जा रही थीं। अधिकारियों ने बताया कि नई जगहों पर बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी और पुलिस द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
सक्रियकारों और नागरिक संगठनों ने इस बदलाव को प्रदर्शन स्थलों में विविधता लाने के अवसर के रूप में सराहा, पर उन्होंने भागीदारी में पहुँच की संभावित कठिनाइयों की भी चेतावनी दी। प्रशासन ने आयोजकों के साथ समन्वय कर सुगम परिवर्तन सुनिश्चित करने और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को बनाए रखने का आश्वासन दिया है।
तीन नई जगहों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं; इन्हें निकट भविष्य में घोषित किया जाएगा, साथ ही क्षमता और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं के बारे में दिशानिर्देश भी जारी किए जाएंगे। यह कदम लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और शहरी व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
हितधारक अब विस्तृत निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो भविष्य के प्रदर्शन के आयोजन को आकार देंगे और दिल्ली के धरना‑प्रदर्शन परिदृश्य में एक नया अध्याय लिखेंगे।
दिल्ली प्रशासन ने यह कदम भीड़ प्रबंधन, ट्रैफ़िक जाम और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए उठाया है, जो जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले सभाओं से बढ़ती जा रही थीं। अधिकारियों ने बताया कि नई जगहों पर बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी और पुलिस द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
सक्रियकारों और नागरिक संगठनों ने इस बदलाव को प्रदर्शन स्थलों में विविधता लाने के अवसर के रूप में सराहा, पर उन्होंने भागीदारी में पहुँच की संभावित कठिनाइयों की भी चेतावनी दी। प्रशासन ने आयोजकों के साथ समन्वय कर सुगम परिवर्तन सुनिश्चित करने और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को बनाए रखने का आश्वासन दिया है।
तीन नई जगहों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं; इन्हें निकट भविष्य में घोषित किया जाएगा, साथ ही क्षमता और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं के बारे में दिशानिर्देश भी जारी किए जाएंगे। यह कदम लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और शहरी व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
हितधारक अब विस्तृत निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो भविष्य के प्रदर्शन के आयोजन को आकार देंगे और दिल्ली के धरना‑प्रदर्शन परिदृश्य में एक नया अध्याय लिखेंगे।