📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Deepak Goyal
धर्म
जगराओं में माता चिंतपूर्णी मंदिर के पास सड़क निर्माण पर श्रेय की राजनीति गरमा
✍️ Amar Ujala · Ludhiana
🗓 26 अग. 2026, 01:58 PM
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जगराओं, पंजाब में माता चिंतपूर्णी मंदिर के पास नई सड़क के निर्माण को लेकर स्थानीय अधिकारियों में श्रेय की राजनीति और आरोप‑प्रत्यारोप की लहर चल रही है।
पंजाब सरकार ने जगराओं, लुधियाना जिले के बाहर स्थित माता चिंतपूर्णी मंदिर तक पहुँच सुधारने के लिये एक छोटी सड़क का प्रस्ताव मंजूर किया। यह परियोजना तीर्थयात्रियों के आवागमन को सुगम बनाने और निकटवर्ती गाँवों को जोड़ने के लिये निर्धारित थी और इस महीने की शुरुआत में कार्य आरम्भ होना था।
पहले ही निर्माण उपकरणों के आगमन से पहले, स्थानीय राजनेता और मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने इस कार्य को शुरू करने के श्रेय के लिये एक दूसरे पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। प्रत्येक पक्ष का दावा है कि उसके प्रस्ताव और दबाव ने इस मंजूरी को दिलवाई, जिससे साधारण बुनियादी ढाँचा कार्य सार्वजनिक विवाद में बदल गया।
यह आरोप‑प्रत्यारोप कार्य शुरू होने में देरी का कारण बना है, जिससे उन भक्तों में असंतोष बढ़ रहा है जो आगामी त्यौहारों के दौरान आसान यात्रा की उम्मीद कर रहे थे। आसपास के निवासियों ने इस विवाद को शीघ्र सुलझाने की माँग की है ताकि सड़क का निर्माण बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
जिला प्रशासन ने सभी पक्षों से इस परियोजना को राजनीति में बदलने से बचने और समय पर पूर्णता पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है, यह रेखांकित करते हुए कि इसका मुख्य उद्देश्य मंदिर के आगंतुकों और स्थानीय समुदाय की सेवा करना है।
पहले ही निर्माण उपकरणों के आगमन से पहले, स्थानीय राजनेता और मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने इस कार्य को शुरू करने के श्रेय के लिये एक दूसरे पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। प्रत्येक पक्ष का दावा है कि उसके प्रस्ताव और दबाव ने इस मंजूरी को दिलवाई, जिससे साधारण बुनियादी ढाँचा कार्य सार्वजनिक विवाद में बदल गया।
यह आरोप‑प्रत्यारोप कार्य शुरू होने में देरी का कारण बना है, जिससे उन भक्तों में असंतोष बढ़ रहा है जो आगामी त्यौहारों के दौरान आसान यात्रा की उम्मीद कर रहे थे। आसपास के निवासियों ने इस विवाद को शीघ्र सुलझाने की माँग की है ताकि सड़क का निर्माण बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
जिला प्रशासन ने सभी पक्षों से इस परियोजना को राजनीति में बदलने से बचने और समय पर पूर्णता पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है, यह रेखांकित करते हुए कि इसका मुख्य उद्देश्य मंदिर के आगंतुकों और स्थानीय समुदाय की सेवा करना है।