📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
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कोर्ट का फैसला: क्लोजर के बाद डिफेंस को बेहतर बनाने के लिए BNSS धारा 348 का इस्तेमाल नहीं
✍️ Live Law
🗓 06 अक्टू. 2026, 08:36 PM
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हाल के एक कानूनी स्पष्टीकरण के अनुसार, जब तक अभियोजन पक्ष अपना मामला बंद नहीं करता, तब तक बंगाली नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 348 के तहत गवाहों को पुनः बुलाने की शक्ति का उपयोग डिफेंस को बेहतर बनाने या पुनर्गठित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
भारत में कानूनी परिदृश्य में नए आपराधिक कानून के तहत प्रक्रियात्मक शक्तियों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया है। हाल के एक न्यायिक अवलोकन ने यह स्थापित किया है कि भागीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 348, जो गवाहों के पुनः बुलाए जाने से संबंधित है, इसके अनुप्रयोग में विशेष सीमाएं हैं।
इस कानूनी व्याख्या का मूल बिंदु यह है कि जब तक अभियोजन पक्ष (प्रोसीक्यूशन) अपनी साक्ष्य पेश करना समाप्त नहीं कर देता, तब तक इस प्रावधान का उपयोग डिफेंस द्वारा अपने मामले को पुनर्गठित करने या बेहतर बनाने के लिए नहीं किया जा सकता। यह फैसला टैक्टिकल देरी को रोकने और सुनिश्चित करने के लिए है कि न्यायिक प्रक्रिया कुशल और न्यायपूर्ण रहे।
BNSS के तहत, जो कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) को बदलने वाला है, गवाहों को पुनः बुलाने की शक्ति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए साक्ष्य सामने आने पर या गवाह की गवाही में सुधार की आवश्यकता होने पर न्याय हो। हालांकि, अदालतों ने यह जोर देकर कहा है कि यह शक्ति आरोपी के लिए एक टूल नहीं है जो राज्य के अपने मामला पेश करने के बाद अपनी डिफेंस रणनीति को रीसेट करने के लिए उपयोग की जा सके।
यह अंतर न्यायिक प्रक्रिया के संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्याख्याएं प्रक्रियात्मक छेड़छाड़ के दुरुपयोग को रोकने में मदद करती हैं, जो अन्यथा आपराधिक प्रक्रियाओं को अनावश्यक रूप से लंबा कर सकती हैं।
इस कानूनी व्याख्या का मूल बिंदु यह है कि जब तक अभियोजन पक्ष (प्रोसीक्यूशन) अपनी साक्ष्य पेश करना समाप्त नहीं कर देता, तब तक इस प्रावधान का उपयोग डिफेंस द्वारा अपने मामले को पुनर्गठित करने या बेहतर बनाने के लिए नहीं किया जा सकता। यह फैसला टैक्टिकल देरी को रोकने और सुनिश्चित करने के लिए है कि न्यायिक प्रक्रिया कुशल और न्यायपूर्ण रहे।
BNSS के तहत, जो कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) को बदलने वाला है, गवाहों को पुनः बुलाने की शक्ति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए साक्ष्य सामने आने पर या गवाह की गवाही में सुधार की आवश्यकता होने पर न्याय हो। हालांकि, अदालतों ने यह जोर देकर कहा है कि यह शक्ति आरोपी के लिए एक टूल नहीं है जो राज्य के अपने मामला पेश करने के बाद अपनी डिफेंस रणनीति को रीसेट करने के लिए उपयोग की जा सके।
यह अंतर न्यायिक प्रक्रिया के संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्याख्याएं प्रक्रियात्मक छेड़छाड़ के दुरुपयोग को रोकने में मदद करती हैं, जो अन्यथा आपराधिक प्रक्रियाओं को अनावश्यक रूप से लंबा कर सकती हैं।