मिट्टी ढुलाई के बिल पर उठे सवाल, फर्जी भुगतान की जांच की मांग
मिट्टी ढुलाई के बिल पर उठे सवाल, फर्जी भुगतान की जांच की मांग
शहडोल। ग्राम पंचायत स्तर पर कराए जा रहे विकास कार्यों में मिट्टी ढुलाई के नाम पर लगाए गए एक बिल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सामने आए दस्तावेज में मिट्टी ढुलाई से संबंधित विवरण दर्ज है, जिसमें मात्रा 100, दर 150 तथा कुल राशि लगभग ₹15,000 दर्शाई गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त बिल में दिखाई गई मिट्टी ढुलाई का कार्य वास्तविक रूप से कराया गया था या नहीं, इसकी जांच किए बिना भुगतान किया गया हो सकता है। बिल में दर्ज मात्रा, दर और वास्तविक स्थल पर किए गए कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाना आवश्यक बताया जा रहा है।
मामले में मांग की गई है कि संबंधित स्थल का मौका निरीक्षण, बिल में दर्शाई गई मात्रा का सत्यापन तथा भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि मिट्टी की ढुलाई के लिए वास्तव में वाहन लगाए गए थे या नहीं और यदि लगाए गए थे तो उनके वाहन नंबर, रसीद एवं अन्य अभिलेख उपलब्ध हैं या नहीं।
जांच के बाद सामने आएगा सच
यदि जांच में बिल में दर्शाई गई मात्रा और वास्तविक कार्य में अंतर पाया जाता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं संबंधित पंचायत एवं अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल दस्तावेज के आधार पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सरकारी राशि के भुगतान में किसी भी प्रकार की अनियमितता है या नहीं, इसका तथ्यात्मक खुलासा हो सके
शहडोल। ग्राम पंचायत स्तर पर कराए जा रहे विकास कार्यों में मिट्टी ढुलाई के नाम पर लगाए गए एक बिल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सामने आए दस्तावेज में मिट्टी ढुलाई से संबंधित विवरण दर्ज है, जिसमें मात्रा 100, दर 150 तथा कुल राशि लगभग ₹15,000 दर्शाई गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त बिल में दिखाई गई मिट्टी ढुलाई का कार्य वास्तविक रूप से कराया गया था या नहीं, इसकी जांच किए बिना भुगतान किया गया हो सकता है। बिल में दर्ज मात्रा, दर और वास्तविक स्थल पर किए गए कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाना आवश्यक बताया जा रहा है।
मामले में मांग की गई है कि संबंधित स्थल का मौका निरीक्षण, बिल में दर्शाई गई मात्रा का सत्यापन तथा भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि मिट्टी की ढुलाई के लिए वास्तव में वाहन लगाए गए थे या नहीं और यदि लगाए गए थे तो उनके वाहन नंबर, रसीद एवं अन्य अभिलेख उपलब्ध हैं या नहीं।
जांच के बाद सामने आएगा सच
यदि जांच में बिल में दर्शाई गई मात्रा और वास्तविक कार्य में अंतर पाया जाता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं संबंधित पंचायत एवं अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल दस्तावेज के आधार पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सरकारी राशि के भुगतान में किसी भी प्रकार की अनियमितता है या नहीं, इसका तथ्यात्मक खुलासा हो सके