📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Amiyashrivastava (talk) (Uploads)
धर्म
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा शरिया कोर्ट केवल धार्मिक राय दे सकते हैं, तलाक नहीं दे सकते
✍️ India Today
🗓 08 सित. 2026, 12:02 PM
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शरिया कोर्ट को वैध तलाक देने का अधिकार नहीं है, वे केवल धार्मिक सलाह दे सकते हैं।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि राज्य में शरिया कोर्ट केवल धार्मिक राय दे सकते हैं और वैध तलाक नहीं दे सकते। कोर्ट ने बताया कि विवाह का समापन एक नागरिक मामला है और इसे भारतीय कानून के तहत ही निपटाया जाना चाहिए।
यह निर्णय उन याचिकाओं के बाद आया था, जिनमें शरिया अदालतों द्वारा दिया गया तलाक वैध नहीं माना गया और यह भारत के समान नागरिक संहिता के सिद्धांतों के विरुद्ध था। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक मार्गदर्शन लेना संभव है, पर अंतिम आदेश केवल सिविल कोर्ट से ही मिल सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला धार्मिक प्रथाओं और धर्मनिरपेक्ष न्याय प्रणाली के बीच स्पष्ट सीमा स्थापित करता है, जिससे सभी तलाक प्रक्रियाएँ समान सुरक्षा मानकों के तहत होंगी।
यह निर्णय उन याचिकाओं के बाद आया था, जिनमें शरिया अदालतों द्वारा दिया गया तलाक वैध नहीं माना गया और यह भारत के समान नागरिक संहिता के सिद्धांतों के विरुद्ध था। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक मार्गदर्शन लेना संभव है, पर अंतिम आदेश केवल सिविल कोर्ट से ही मिल सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला धार्मिक प्रथाओं और धर्मनिरपेक्ष न्याय प्रणाली के बीच स्पष्ट सीमा स्थापित करता है, जिससे सभी तलाक प्रक्रियाएँ समान सुरक्षा मानकों के तहत होंगी।