📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NASA/GSFC/MITI/ERSDAC/JAROS, and U.S./Japan ASTER
विज्ञान
छत्तीसगढ़ ने नदी पुनरुद्धार के लिए उपग्रह तकनीक अपनाई
✍️ The Times of India
🗓 20 अग. 2026, 02:37 AM
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छत्तीसगढ़ सरकार अपने बिगड़ते नदियों की निगरानी और पुनरुद्धार के लिए उपग्रह डेटा व वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग कर रही है।
छत्तीसगढ़ ने एक नई पहल की घोषणा की है, जिसमें उपग्रह इमेजरी और रिमोट‑सेंसिंग तकनीक का उपयोग करके नदी बेसिन की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस विधि से जल प्रवाह, तलछट और प्रदूषण स्तर की वास्तविक‑समय निगरानी संभव होगी, जिससे लक्षित पुनरुद्धार कार्यों के लिए वैज्ञानिक आधार मिलेगा।
इस कार्यक्रम के तहत भारतीय अंतरिक्ष एजेंसियों के डेटा को जमीनी सर्वेक्षणों के साथ मिलाकर कटाव, अतिक्रमण और अवैध रेत खनन की पहचान की जाएगी। तैयार किए गए मानचित्रों से वृक्षारोपण, चेक‑डैम निर्माण और नियमनित जल रिलीज़ जैसे उपायों को दिशा मिल सकेगी।
राज्य के प्रतिनिधियों ने बताया कि विज्ञान‑आधारित यह रणनीति मौजूदा सामुदायिक प्रयासों को पूरक करेगी, जिससे पुनरुद्धार परियोजनाएँ दीर्घकालिक रूप से प्रभावी और टिकाऊ बनेंगी। यह पहल भारतीय राज्यों में डेटा‑केंद्रित पर्यावरण प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
परियोजना की शुरुआत महानदी और उसकी सहायक नदियों पर पायलट अध्ययन से की जाएगी, तथा प्रारंभिक परिणामों के आधार पर कार्यप्रणाली को समय‑समय पर सुधारा जाएगा।
स्थानीय NGOs और कृषि सहकारी समितियों सहित कई हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया है, यह मानते हुए कि सटीक नदी डेटा बाढ़ जोखिम को कम करने और किसानों के लिए सिंचाई की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेगा।
इस कार्यक्रम के तहत भारतीय अंतरिक्ष एजेंसियों के डेटा को जमीनी सर्वेक्षणों के साथ मिलाकर कटाव, अतिक्रमण और अवैध रेत खनन की पहचान की जाएगी। तैयार किए गए मानचित्रों से वृक्षारोपण, चेक‑डैम निर्माण और नियमनित जल रिलीज़ जैसे उपायों को दिशा मिल सकेगी।
राज्य के प्रतिनिधियों ने बताया कि विज्ञान‑आधारित यह रणनीति मौजूदा सामुदायिक प्रयासों को पूरक करेगी, जिससे पुनरुद्धार परियोजनाएँ दीर्घकालिक रूप से प्रभावी और टिकाऊ बनेंगी। यह पहल भारतीय राज्यों में डेटा‑केंद्रित पर्यावरण प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
परियोजना की शुरुआत महानदी और उसकी सहायक नदियों पर पायलट अध्ययन से की जाएगी, तथा प्रारंभिक परिणामों के आधार पर कार्यप्रणाली को समय‑समय पर सुधारा जाएगा।
स्थानीय NGOs और कृषि सहकारी समितियों सहित कई हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया है, यह मानते हुए कि सटीक नदी डेटा बाढ़ जोखिम को कम करने और किसानों के लिए सिंचाई की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेगा।