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बीदर में गणेश विसर्जन जुलूस, सुरक्षा व्यवस्था के साथ संपन्न
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गणेश चतुर्थी के बाद बीदर शहर व जिले में भव्य विसर्जन जुलूस चल रहा है, जिसमें पुलिस की कड़ी सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जा रहा है।
बीदर शहर और जिले में गणेश चतुर्थी के बाद गणेश विसर्जन की प्रक्रिया जारी है। देवी कॉलोनी, शाहपुर गेट, पुरानी बीदर तथा आसपास के इलाकों से भव्य जुलूस निकाले जा रहे हैं, जहाँ डिजे और पारम्परिक बाजा‑गाजा के साथ विसर्जन रथ तालाबों और निर्धारित विसर्जन स्थलों की ओर बढ़ रहे हैं।
जिला मंत्री ईश्वर खंड़े ने भालकी स्थित अपने आवास पर गणेश चतुर्थी पूजा समाप्त की और जिला प्रशासन को विसर्जन को शांति‑पूर्वक संपन्न कराने तथा सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। पुलिस विभाग ने बीदर शहर और प्रमुख तहसीलों—भालकी, हुमनाबाद, बसवकल्याण—में भारी पुलिस बल तैनात कर शांति व्यवस्था को सुनिश्चित किया, संवेदनशील इलाकों और विसर्जन मार्गों पर सीसीटीवी निगरानी तथा गश्त बढ़ा दी।
पर्यावरणीय अनुपालन के संदर्भ में प्रशासन ने जनता से केवल मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करने और निर्धारित कृत्रिम कुंडों या निर्दिष्ट जलाशयों में ही विसर्जन करने की अपील की। इस दिशा‑निर्देशों का पालन करते हुए विसर्जन समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ, जहाँ 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारों ने शहर को गूँजते हुए विदाई दी।
विसर्जन के अवसर पर प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा निकाली गई, जहाँ पारम्परिक पोशाक में सजे युवा एवं महिलाएँ डिजे, ताशा‑बैंड और ढोल की धुन पर नृत्य कर रहे थे। मार्ग में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद और शीतल जल की व्यवस्था की गई, जिससे जनसमूह को सुविधा प्राप्त हुई।
जिला मंत्री ईश्वर खंड़े ने भालकी स्थित अपने आवास पर गणेश चतुर्थी पूजा समाप्त की और जिला प्रशासन को विसर्जन को शांति‑पूर्वक संपन्न कराने तथा सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। पुलिस विभाग ने बीदर शहर और प्रमुख तहसीलों—भालकी, हुमनाबाद, बसवकल्याण—में भारी पुलिस बल तैनात कर शांति व्यवस्था को सुनिश्चित किया, संवेदनशील इलाकों और विसर्जन मार्गों पर सीसीटीवी निगरानी तथा गश्त बढ़ा दी।
पर्यावरणीय अनुपालन के संदर्भ में प्रशासन ने जनता से केवल मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करने और निर्धारित कृत्रिम कुंडों या निर्दिष्ट जलाशयों में ही विसर्जन करने की अपील की। इस दिशा‑निर्देशों का पालन करते हुए विसर्जन समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ, जहाँ 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारों ने शहर को गूँजते हुए विदाई दी।
विसर्जन के अवसर पर प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा निकाली गई, जहाँ पारम्परिक पोशाक में सजे युवा एवं महिलाएँ डिजे, ताशा‑बैंड और ढोल की धुन पर नृत्य कर रहे थे। मार्ग में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद और शीतल जल की व्यवस्था की गई, जिससे जनसमूह को सुविधा प्राप्त हुई।