📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / 15th BRICS SUMMIT
राजनीति
BRICS ने गुवाहाटी घोषणा को मान्यता दी, असम की नशा‑मुक्ति पहल को मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन
✍️ India Today NE
🗓 14 सित. 2026, 08:16 PM
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BRICS ने गुवाहाटी घोषणा को आधिकारिक मान्यता दी, असम की नशा‑मुक्ति रणनीति को अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्रदान किया।
नई दिल्ली – ब्रिक्स समूह (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) ने हालिया शिखर सम्मेलन में गुवाहाटी घोषणा को आधिकारिक रूप से मान्यता दी, जिससे असम की नशा‑मुक्ति रणनीति को प्रथम बहुपक्षीय समर्थन मिला। इस मान्यता की घोषणा ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के कम्युनिकेट में की गई, जिसमें ड्रग तस्करी को रोकने और क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने पर प्रकाश डाला गया।
गुवाहाटी घोषणा, जिसे असम सरकार ने तैयार किया है, में कड़ी सीमा नियंत्रण, खुफिया जानकारी का साझा करना और सामुदायिक पुनर्वास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना शामिल है। यह विधायी एजेंसियों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता और उत्तर‑पूर्व में नशा प्रवाह की निगरानी के लिए एक विशेष टास्क‑फ़ोर्स की स्थापना का भी प्रस्ताव रखती है।
ब्रिक्स के नेताओं ने इस पहल को नशा‑समस्या से जूझ रहे अन्य क्षेत्रों के लिए मॉडल बताया और तकनीकी सहायता व क्षमता‑निर्माण समर्थन का वादा किया। असम के मुख्यमंत्री ने इस मान्यता का स्वागत करते हुए कहा कि इससे राज्य की ड्रग नेटवर्क को तोड़ने और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा में तेजी आएगी।
इस मान्यता से सदस्य देशों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान‑प्रदान संभव होगा, जिससे भारत की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशा‑विरोधी रणनीति को मजबूती मिलेगी।
गुवाहाटी घोषणा, जिसे असम सरकार ने तैयार किया है, में कड़ी सीमा नियंत्रण, खुफिया जानकारी का साझा करना और सामुदायिक पुनर्वास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना शामिल है। यह विधायी एजेंसियों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता और उत्तर‑पूर्व में नशा प्रवाह की निगरानी के लिए एक विशेष टास्क‑फ़ोर्स की स्थापना का भी प्रस्ताव रखती है।
ब्रिक्स के नेताओं ने इस पहल को नशा‑समस्या से जूझ रहे अन्य क्षेत्रों के लिए मॉडल बताया और तकनीकी सहायता व क्षमता‑निर्माण समर्थन का वादा किया। असम के मुख्यमंत्री ने इस मान्यता का स्वागत करते हुए कहा कि इससे राज्य की ड्रग नेटवर्क को तोड़ने और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा में तेजी आएगी।
इस मान्यता से सदस्य देशों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान‑प्रदान संभव होगा, जिससे भारत की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशा‑विरोधी रणनीति को मजबूती मिलेगी।