📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / A.Savin
राजनीति
बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को शोर प्रदूषण पर लापरवाह रवैये के लिए फटकारा
✍️ Mid-Day
🗓 24 सित. 2026, 05:32 AM
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की शोर प्रदूषण को हल्का समझने की नीति की निंदा की, कड़े नियमों के पालन की मांग की।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार की शोर प्रदूषण संबंधी कार्यवाही पर कड़ी टिका-टिप्पणी की। लिखित आदेश में कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारियों ने निवासियों और नागरिक संगठनों की लगातार शिकायतों के बावजूद "सब ठीक है" का रवैया अपनाया है।
कोर्ट ने सरकार को 2000 के शोर प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियमों के तहत अपने कर्तव्य की याद दिलाई, जिसमें आवासीय क्षेत्रों, अस्पतालों और स्कूलों के निकट ध्वनि स्तर को नियंत्रित करना शामिल है। दो हफ्तों के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली प्रशासनिक लापरवाही पर न्यायपालिका के हस्तक्षेप को दर्शाता है। इस आदेश से अवैध लाउडस्पीकर, देर रात निर्माण कार्य और अन्य शोर स्रोतों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
कोर्ट ने सरकार को 2000 के शोर प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियमों के तहत अपने कर्तव्य की याद दिलाई, जिसमें आवासीय क्षेत्रों, अस्पतालों और स्कूलों के निकट ध्वनि स्तर को नियंत्रित करना शामिल है। दो हफ्तों के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली प्रशासनिक लापरवाही पर न्यायपालिका के हस्तक्षेप को दर्शाता है। इस आदेश से अवैध लाउडस्पीकर, देर रात निर्माण कार्य और अन्य शोर स्रोतों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।