शिक्षा
बलिया में विद्यालय परिसर में करंट की चपेट में आने से मासूम अरशद की मृत्यु, शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
बलिया के एक विद्यालय परिसर में हाईटेंशन तार की चपेट में आने से मासूम अरशद की मौत के बाद शिक्षक संगठनों ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। शिक्षक समुदाय ने मांग की है कि सिर्फ शिक्षकों को दोषी ठहराने के बजाय बिजली विभाग और शिक्षा अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
बलिया के एक विद्यालय परिसर में हाईटेंशन तार की चपेट में आने से मासूम अरशद की असमय मृत्यु की घटना ने पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद शिक्षक संगठनों और प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाते हुए शिक्षकों को अपराधी बनाकर पेश करने की नीति का पुरजोर विरोध किया है। शिक्षक समुदाय का कहना है कि विद्यालय शिक्षा का मंदिर है और शिक्षक बच्चों के संरक्षक माने जाते हैं, इसलिए उन्हें इस तरह मुजरिम बनाकर नुमाइश के लिए खड़ा करना उचित नहीं है।
शिक्षक संगठनों ने इस मौके पर कई बुनियादी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि शासन और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद स्कूल की छत पर हाईटेंशन तार क्यों रखा गया था? बिजली विभाग के शीर्ष अधिकारियों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी थी कि वे इस जानलेवा तार को स्कूल की चौहद्दी से दूर कराएं। शिक्षक समुदाय ने पूछा है कि क्या बिजली विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, जिन्होंने इस खतरे को नजरअंदाज किया।
इसके अलावा, शिक्षा विभाग के निरीक्षण तंत्र पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षक प्रतिनिधियों ने पूछा है कि क्या समय-समय पर स्कूल के दौरे पर जाने वाले अधिकारियों को यह झूलता हुआ हाईटेंशन तार नहीं दिखा? इंफ्रास्ट्रक्चर की इस जानलेवा लापरवाही पर अब तक चुप्पी साधे रहने का कारण भी जाना चाहते हैं। उनका मानना है कि घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन सिस्टम की शीर्ष लापरवाहियों पर पर्दा डालकर सिर्फ शिक्षकों को अपराधी बनाकर पेश करना घोर निंदनीय है।
शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि मासूम बच्चे को न्याय तभी मिलेगा जब उन ज़िम्मेदार विभागों और शीर्ष अफसरों की जवाबदेही तय होगी, जिनकी सुस्ती ने स्कूल परिसर में यह खतरा खुला छोड़ रखा था। शिक्षक समुदाय ने अपनी मर्यादा और स्वाभिमान की रक्षा के लिए इस तरह के अपमानजनक कृत्य का विरोध करने और एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है।
शिक्षक संगठनों ने इस मौके पर कई बुनियादी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि शासन और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद स्कूल की छत पर हाईटेंशन तार क्यों रखा गया था? बिजली विभाग के शीर्ष अधिकारियों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी थी कि वे इस जानलेवा तार को स्कूल की चौहद्दी से दूर कराएं। शिक्षक समुदाय ने पूछा है कि क्या बिजली विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, जिन्होंने इस खतरे को नजरअंदाज किया।
इसके अलावा, शिक्षा विभाग के निरीक्षण तंत्र पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षक प्रतिनिधियों ने पूछा है कि क्या समय-समय पर स्कूल के दौरे पर जाने वाले अधिकारियों को यह झूलता हुआ हाईटेंशन तार नहीं दिखा? इंफ्रास्ट्रक्चर की इस जानलेवा लापरवाही पर अब तक चुप्पी साधे रहने का कारण भी जाना चाहते हैं। उनका मानना है कि घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन सिस्टम की शीर्ष लापरवाहियों पर पर्दा डालकर सिर्फ शिक्षकों को अपराधी बनाकर पेश करना घोर निंदनीय है।
शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि मासूम बच्चे को न्याय तभी मिलेगा जब उन ज़िम्मेदार विभागों और शीर्ष अफसरों की जवाबदेही तय होगी, जिनकी सुस्ती ने स्कूल परिसर में यह खतरा खुला छोड़ रखा था। शिक्षक समुदाय ने अपनी मर्यादा और स्वाभिमान की रक्षा के लिए इस तरह के अपमानजनक कृत्य का विरोध करने और एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है।