📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / CorrectKnowledge
राजनीति
माउंटआबू में भाजपा चेयरमैन तय, सिरोही जिले में स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारी
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 20 सित. 2026, 10:31 PM
👁 14
भाजपा ने माउंटआबू में अपने चेयरमैन को तय कर लिया है, जबकि सिरोही जिले के छह निकायों में सोमवार को अध्यक्ष पद के लिए मतदान होगा, जिसमें आबूरोड और मंडार में स्वतंत्र पार्षदों का महत्व रहेगा।
माउंटआबू, राजस्थान – भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को एक क्षेत्रीय बोर्ड के चेयरमैन के लिए अपना आंतरिक चयन पूरा कर लिया, जिससे सिरोही जिले के छह पंचायत समितियों में अध्यक्ष पद के चुनाव की महत्ता बढ़ गई। उसी दिन होने वाले मतदान से प्रत्येक निकाय के विकास कार्यों और प्रशासनिक समन्वय की देखरेख करने वाले चेयरमैन का चयन होगा।
इन छह निकायों में आबूरोड और मंडार पंचायत समितियों में स्वतंत्र पार्षदों के पास संतुलन बनाने की शक्ति है, जिससे मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वतंत्र पार्षदों के समर्थन से भाजपा या कांग्रेस में से किसी एक को फायदेमंद स्थिति मिल सकती है।
सिरोही जिले में भाजपा को कई निकायों में कांग्रेस के साथ सीधा मुकाबला करना पड़ेगा, जबकि कुछ क्षेत्रों में कई दलों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है। इन परिणामों से राज्य‑स्तर के आगामी चुनावों से पहले पार्टी की इस क्षेत्र में पकड़ पर असर पड़ेगा।
चुनाव अधिकारियों ने मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की है और आबूरोड, मंडार व शेष चार निकायों के मतदान स्थलों पर सुरक्षा को कड़ा किया गया है। जल आपूर्ति, सड़क कनेक्टिविटी और कृषि समर्थन जैसे स्थानीय मुद्दे चुनावी बहस के मुख्य बिंदु बने हुए हैं।
परिणामों की घोषणा सोमवार के बाद ही की जाएगी, और राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में अगले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों के पुनः आकार को लेकर राज्य के नेताओं की नज़रें इस पर टिकी रहेंगी।
इन छह निकायों में आबूरोड और मंडार पंचायत समितियों में स्वतंत्र पार्षदों के पास संतुलन बनाने की शक्ति है, जिससे मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वतंत्र पार्षदों के समर्थन से भाजपा या कांग्रेस में से किसी एक को फायदेमंद स्थिति मिल सकती है।
सिरोही जिले में भाजपा को कई निकायों में कांग्रेस के साथ सीधा मुकाबला करना पड़ेगा, जबकि कुछ क्षेत्रों में कई दलों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है। इन परिणामों से राज्य‑स्तर के आगामी चुनावों से पहले पार्टी की इस क्षेत्र में पकड़ पर असर पड़ेगा।
चुनाव अधिकारियों ने मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की है और आबूरोड, मंडार व शेष चार निकायों के मतदान स्थलों पर सुरक्षा को कड़ा किया गया है। जल आपूर्ति, सड़क कनेक्टिविटी और कृषि समर्थन जैसे स्थानीय मुद्दे चुनावी बहस के मुख्य बिंदु बने हुए हैं।
परिणामों की घोषणा सोमवार के बाद ही की जाएगी, और राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में अगले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों के पुनः आकार को लेकर राज्य के नेताओं की नज़रें इस पर टिकी रहेंगी।