📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
जीवनशैली
बिहार की चापा कला अब शादी से परे लोकप्रिय
✍️ The Times of India
🗓 14 सित. 2026, 03:36 AM
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बिहार की पारंपरिक चापा कला, जो पहले केवल शादियों में इस्तेमाल होती थी, अब घर की सजावट और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकप्रिय हो रही है।
बिहार की चापा, जो पहले शादियों में मेहँदी, मंडप और पिचकारी जैसे सजावटी तत्वों के रूप में प्रयोग होती थी, अब अपने उपयोग में बदलाव देख रही है। कारीगरों का कहना है कि अब ग्राहकों ने घर की सजावट, दीवार पैनल, फर्नीचर और विभिन्न त्यौहारों के लिए चापा डिज़ाइन की मांग बढ़ा दी है।
यह प्रवृत्ति शहरी उपभोक्ताओं में क्षेत्रीय शिल्पों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है, जो प्रामाणिक और स्थानीय रूप से निर्मित सजावट को प्राथमिकता देते हैं। स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर शादी‑संबंधी उपयोग से अलग चापा वस्तुओं के ऑर्डर में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ती मांग से कारीगरों की आजीविका को समर्थन मिलता है और युवा पीढ़ी को जटिल पेंटिंग व अप्लिकेशन तकनीकें सीखने के लिए प्रेरित किया जाता है। चापा अब सांस्कृतिक महोत्सवों और प्रदर्शनों में भी दिखाया जा रहा है, जिससे यह बिहार की समकालीन सौंदर्यशास्त्र में अपनी नई पहचान बना रहा है।
यह प्रवृत्ति शहरी उपभोक्ताओं में क्षेत्रीय शिल्पों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है, जो प्रामाणिक और स्थानीय रूप से निर्मित सजावट को प्राथमिकता देते हैं। स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर शादी‑संबंधी उपयोग से अलग चापा वस्तुओं के ऑर्डर में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ती मांग से कारीगरों की आजीविका को समर्थन मिलता है और युवा पीढ़ी को जटिल पेंटिंग व अप्लिकेशन तकनीकें सीखने के लिए प्रेरित किया जाता है। चापा अब सांस्कृतिक महोत्सवों और प्रदर्शनों में भी दिखाया जा रहा है, जिससे यह बिहार की समकालीन सौंदर्यशास्त्र में अपनी नई पहचान बना रहा है।