📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Aiha0220
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बिहार ने नेपाल बाढ़ में मिली लाशों की पहचान के लिए रिश्तेदारों से डीएनए नमूने मांगे
✍️ India Today
🗓 16 सित. 2026, 02:32 AM
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बिहार सरकार ने हाल ही में नेपाल में आई बाढ़ के बाद मिली लाशों की पहचान के लिए रिश्तेदारों से डीएनए नमूने देने का अनुरोध किया है।
पटना, बिहार – नेपाल में इस महीने की शुरुआत में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद, बिहार सरकार ने बचे हुए शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूने एकत्र करने की पहल शुरू की है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने लापता व्यक्तियों के रिश्तेदारों से अनुरोध किया है कि वे अपने डीएनए नमूने प्रस्तुत करें, जिन्हें सीमा पार पाए गए शवों से मिलान किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम परिवारों को सच्चाई प्रदान करने और मृतकों का सही रजिस्टर बनाने में मदद करेगा। डीएनए परीक्षण नेपाल के सहयोगियों के साथ समन्वय में किया जाएगा, और नमूनों को बिहार के निर्दिष्ट प्रयोगशालाओं में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की देखरेख में प्रोसेस किया जाएगा।
नेपाल के तराई क्षेत्र में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान‑माल की हानि और विस्थापन किया, जिससे कई लोग पड़ोसी भारतीय राज्यों, विशेषकर बिहार में शरण ले गए। राहत कार्य जारी है, जबकि यह डीएनए पहचान कार्यक्रम आपदा के मानवीय प्रभावों को संभालने में दो‑तरफा सहयोग को दर्शाता है।
बिहार सरकार ने जिले के मुख्यालयों में संग्रह बिंदु स्थापित किए हैं और परिवारों से शीघ्र प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया है, यह बताते हुए कि समय पर डीएनए जमा करने से पहचान प्रक्रिया तेज़ होगी और मृतकों के आधिकारिक दस्तावेज़ीकरण में सहायता मिलेगी।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम परिवारों को सच्चाई प्रदान करने और मृतकों का सही रजिस्टर बनाने में मदद करेगा। डीएनए परीक्षण नेपाल के सहयोगियों के साथ समन्वय में किया जाएगा, और नमूनों को बिहार के निर्दिष्ट प्रयोगशालाओं में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की देखरेख में प्रोसेस किया जाएगा।
नेपाल के तराई क्षेत्र में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान‑माल की हानि और विस्थापन किया, जिससे कई लोग पड़ोसी भारतीय राज्यों, विशेषकर बिहार में शरण ले गए। राहत कार्य जारी है, जबकि यह डीएनए पहचान कार्यक्रम आपदा के मानवीय प्रभावों को संभालने में दो‑तरफा सहयोग को दर्शाता है।
बिहार सरकार ने जिले के मुख्यालयों में संग्रह बिंदु स्थापित किए हैं और परिवारों से शीघ्र प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया है, यह बताते हुए कि समय पर डीएनए जमा करने से पहचान प्रक्रिया तेज़ होगी और मृतकों के आधिकारिक दस्तावेज़ीकरण में सहायता मिलेगी।