📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Extra999
बिज़नेस
बिहार के पीएसीएस ने पेट्रोल‑डिजल रिटेल आउटलेट्स पर किया निशाना
✍️ Indian Cooperative
🗓 25 अग. 2026, 01:33 PM
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बिहार के सहकारी क्रेडिट सोसाइटी पेट्रोल‑डिजल रिटेल स्टेशनों की स्थापना करके आय के नए स्रोत तलाश रही हैं।
बिहार में कार्यरत प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटी (पीएसीएस) पेट्रोल और डिजल रिटेल आउटलेट्स स्थापित करने की संभावना का अध्ययन कर रही हैं। स्रोतों के अनुसार, यह कदम पारंपरिक कृषि वित्तीय सेवाओं से आय के स्रोत को विविधित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
स्वीकृति मिलने पर पीएसीएस तेल कंपनियों के साथ साझेदारी करके ईंधन आपूर्ति अनुबंध करेंगे और अपनी मौजूदा शाखाओं के नेटवर्क का उपयोग करके स्थान चयन व स्थानीय बाजार की जानकारी जुटाएंगे। इससे ग्रामीण और अर्ध‑शहरी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
राज्य अधिकारियों ने अभी तक विस्तृत नीति दिशा‑निर्देश जारी नहीं किए हैं, पर वे लाइसेंसिंग, मूल्य निर्धारण और अनुपालन संबंधी नियमों को रेखांकित करने वाला ढांचा तैयार करने की संभावना बना रहे हैं। अन्य राज्यों में इसी तरह के सहकारी‑आधारित ईंधन रिटेल मॉडल के मिश्रित परिणाम देखे गए हैं।
सहकारी क्षेत्र का लक्ष्य ईंधन रिटेल में प्रवेश करके अपनी वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करना है, जिससे वह किसानों को अधिक ऋण प्रदान कर सके और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश कर सके।
यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है और अंतिम निर्णय नियामक अनुमोदन और अध्ययन के परिणामों पर निर्भर करेगा।
स्वीकृति मिलने पर पीएसीएस तेल कंपनियों के साथ साझेदारी करके ईंधन आपूर्ति अनुबंध करेंगे और अपनी मौजूदा शाखाओं के नेटवर्क का उपयोग करके स्थान चयन व स्थानीय बाजार की जानकारी जुटाएंगे। इससे ग्रामीण और अर्ध‑शहरी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
राज्य अधिकारियों ने अभी तक विस्तृत नीति दिशा‑निर्देश जारी नहीं किए हैं, पर वे लाइसेंसिंग, मूल्य निर्धारण और अनुपालन संबंधी नियमों को रेखांकित करने वाला ढांचा तैयार करने की संभावना बना रहे हैं। अन्य राज्यों में इसी तरह के सहकारी‑आधारित ईंधन रिटेल मॉडल के मिश्रित परिणाम देखे गए हैं।
सहकारी क्षेत्र का लक्ष्य ईंधन रिटेल में प्रवेश करके अपनी वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करना है, जिससे वह किसानों को अधिक ऋण प्रदान कर सके और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश कर सके।
यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है और अंतिम निर्णय नियामक अनुमोदन और अध्ययन के परिणामों पर निर्भर करेगा।