📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TheManishPanwar
सरकारी योजना
बिहार के विधायक सच्चिदानंद राय ने पीएम आवास योजना की सूची में गड़बड़ी की जांच मांगी
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 30 सित. 2026, 07:16 PM
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बिहार के विधायक सच्चिदानंद राय ने पीएम आवास योजना की सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से जांच की मांग की है।
बिहार के विधायी सदस्य सच्चिदानंद राय ने प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी सूची में संभावित गड़बड़ी को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस सूची में ऐसी अनियमितताएँ दिख रही हैं जो योग्य आवेदकों को बाहर कर सकती हैं या कुछ लोगों को अनावश्यक लाभ दे सकती हैं।
राय ने इस मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन को औपचारिक पत्र लिखा, जिसमें सूची का विस्तृत ऑडिट और चयन मानदंडों की जाँच करने की मांग की गई। उन्होंने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और यदि कोई दुरुपयोग पाया गया तो त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया।
जिला प्रशासन ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, पर अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस शिकायत की समीक्षा करेंगे और सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतों के मानक प्रोटोकॉल के अनुसार जांच शुरू करेंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना, 2016 में शुरू हुई, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सस्ती आवास प्रदान करने के उद्देश्य से कार्य करती है। यदि इस योजना की प्रक्रियाओं में कोई भी विचलन हुआ तो यह योजना की विश्वसनीयता और लाभार्थियों पर असर डाल सकता है।
स्थानीय NGOs और समुदाय के नेताओं ने भी इस जांच के परिणाम में रुचि जताई है, और बिहार के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आवास लाभ के निष्पक्ष वितरण की आवश्यकता पर बल दिया है।
राय ने इस मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन को औपचारिक पत्र लिखा, जिसमें सूची का विस्तृत ऑडिट और चयन मानदंडों की जाँच करने की मांग की गई। उन्होंने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और यदि कोई दुरुपयोग पाया गया तो त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया।
जिला प्रशासन ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, पर अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस शिकायत की समीक्षा करेंगे और सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतों के मानक प्रोटोकॉल के अनुसार जांच शुरू करेंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना, 2016 में शुरू हुई, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सस्ती आवास प्रदान करने के उद्देश्य से कार्य करती है। यदि इस योजना की प्रक्रियाओं में कोई भी विचलन हुआ तो यह योजना की विश्वसनीयता और लाभार्थियों पर असर डाल सकता है।
स्थानीय NGOs और समुदाय के नेताओं ने भी इस जांच के परिणाम में रुचि जताई है, और बिहार के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आवास लाभ के निष्पक्ष वितरण की आवश्यकता पर बल दिया है।