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आंधी में गिरे सरकारी पेड़ों की लकड़ी गायब: खबर के बाद हरकत में वन विभाग, सरवा नर्सरी पहुंची लकड़ी
लखीमपुर खीरी में आंधी से गिरे सरकारी पेड़ों की लकड़ी के गायब होने के मामले में मीडिया में खबर छपने के बाद वन विभाग हरकत में आया है। विभाग ने आनन-फानन में कुछ लकड़ी सरवा नर्सरी पहुंचाई है, लेकिन अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं।
लखीमपुर खीरी। शारदानगर रेंज में आंधी में गिरे सरकारी पेड़ों की लकड़ी के गायब होने के मामले में खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग में हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि वन विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में आंधी में गिरे कुछ पेड़ों की लकड़ी सरवा नर्सरी में पहुंचा दी है। हालांकि, मौके पर पहुंचाई गई लकड़ी की मात्रा और उसके स्रोत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, दक्षिण खीरी वन प्रभाग की शारदानगर रेंज में बीते दिनों तेज बारिश और आंधी के दौरान सड़क किनारे अर्जुन, जंगल जलेबी सहित कई प्रजातियों के सरकारी पेड़ गिर गए थे। टेढ़ुई पुलिया से फूलबेहड़ और सरवा जाने वाले मार्ग पर बड़ी संख्या में पेड़ धराशायी हुए थे। गिरे पेड़ों को हटवाने की जिम्मेदारी संबंधित वनकर्मियों को सौंपी गई थी। आरोप है कि गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी को काटकर कहीं और ले जाया गया और कुछ लकड़ी को कथित रूप से निजी स्तर पर बेच दिया गया।
मामले की जानकारी लेने पर लकड़ी रेंज कार्यालय अथवा संबंधित नर्सरी में उपलब्ध न होने की बात सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग की ओर से सरवा नर्सरी में कुछ लकड़ी पहुंचाई गई। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी पहले से सरकारी नर्सरी में रखी जानी थी तो बाकी लकड़ी कहां गई और उसका सरकारी अभिलेखों में क्या विवरण दर्ज है?
स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि आंधी में गिरे सरकारी पेड़ों की संख्या, उनकी काटी गई लकड़ी की मात्रा, नीलामी अथवा परिवहन से संबंधित अभिलेख और वर्तमान में नर्सरी में रखी लकड़ी का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। विभागीय अधिकारियों से मामले को लेकर जानकारी मांगी गई है, लेकिन अभी तक डिप्टी रेंजर संजय आजाद से संपर्क नहीं हो सका है।
जानकारी के अनुसार, दक्षिण खीरी वन प्रभाग की शारदानगर रेंज में बीते दिनों तेज बारिश और आंधी के दौरान सड़क किनारे अर्जुन, जंगल जलेबी सहित कई प्रजातियों के सरकारी पेड़ गिर गए थे। टेढ़ुई पुलिया से फूलबेहड़ और सरवा जाने वाले मार्ग पर बड़ी संख्या में पेड़ धराशायी हुए थे। गिरे पेड़ों को हटवाने की जिम्मेदारी संबंधित वनकर्मियों को सौंपी गई थी। आरोप है कि गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी को काटकर कहीं और ले जाया गया और कुछ लकड़ी को कथित रूप से निजी स्तर पर बेच दिया गया।
मामले की जानकारी लेने पर लकड़ी रेंज कार्यालय अथवा संबंधित नर्सरी में उपलब्ध न होने की बात सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग की ओर से सरवा नर्सरी में कुछ लकड़ी पहुंचाई गई। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी पहले से सरकारी नर्सरी में रखी जानी थी तो बाकी लकड़ी कहां गई और उसका सरकारी अभिलेखों में क्या विवरण दर्ज है?
स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि आंधी में गिरे सरकारी पेड़ों की संख्या, उनकी काटी गई लकड़ी की मात्रा, नीलामी अथवा परिवहन से संबंधित अभिलेख और वर्तमान में नर्सरी में रखी लकड़ी का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। विभागीय अधिकारियों से मामले को लेकर जानकारी मांगी गई है, लेकिन अभी तक डिप्टी रेंजर संजय आजाद से संपर्क नहीं हो सका है।